June 16, 2026
BIHAR (2)

टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से संचालित वाडी परियोजना से सरायकेला खरसावां जिले के आदिवासी व ग्रामीण परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है. यह परियोजना नाबार्ड से समर्थित है जिसके तहत बागवानी आधारित खेती, जल संरक्षण व वैकल्पिक आजीविका को बढ़ावा देकर सैकड़ों परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है. किसान आम की कमाई से करीब 1.6 करोड़ तक कमाई कर रहे हैं।

सोमवार को सरायकेला खरसावां जिले के रंगामटिया गांव में मीडिया से बातचीत में टाटा स्टील फाउंडेशन के एग्रीकल्चर मैनेजर अंकित श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि मार्च, 2016 से मार्च, 2025 तक संचालित परियोजना के तहत स्वीकृत 22 गांवों के बजाय 36 गांवों को शामिल किया गया. परियोजना से 379 एकड़ भूमि पर 388 परिवार जुड़े, जबकि 57 भूमिहीन परिवारों को पशुपालन आधारित वैकल्पिक आजीविका उपलब्ध करायी गई है. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत आदिवासी परिवारों के लिए स्थायी आजीविका परिसंपत्तियों का निर्माण करना था. बंजर व अनुपयोगी भूमि को उत्पादक बागानों में परिवर्तित कर किसानों को नियमित आय का स्रोत उपलब्ध कराया गया है. आज किसान अपनी जमीन से सम्मानजनक आय अर्जित कर रहे हैं।

एक एकड़ से शुरू हुई थी खेती, आज 16 एकड़ में बागान

टाटा स्टील फाउंडेशन के एग्रीकल्चर मैनेजर अंकित श्रीवास्तव ने कहा कि रंगामटिया गांव के किसान सोनाराम सोरेन ने परियोजना के तहत एक एकड़ में आम की खेती शुरू की थी, जो वर्तमान में गांव के 16 किसान 16 एकड़ क्षेत्र में आम की खेती कर रहे हैं और प्रतिवर्ष 80 हजार से एक लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं. किसान इस परियोजना के तहत अपने बागानो में आम्रपाली, नीलम, किशन भोग, दशहरी, लंगड़ा जैसी व्यावसायिक किस्मों के आम व अमरूद के पेड़ लगाए है जिससे उन्होंने सालाना अच्छी कमाई हो रही है. वर्ष 2016 में लगाए गए आम के पौधों ने 2021 से व्यावसायिक उत्पादन देना शुरू किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसान प्रति एकड़ तीन से चार टन आम का उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।

किसान जमकर कर रहे आम व अमरूद की बागवानी

इस योनजा के तहत किसानों ने करीब 25,800 से अधिक आम व 9,800 अमरूद के पौधे लगाए गए. भविष्य की आय को ध्यान में रखते हुए बाउंड्री क्रॉप के रूप में सागवान के पौधे भी रोपे गए हैं. किसानों को बाजार से जोडऩे के लिए उलबाहा किसान उत्पादक कंपनी (एफपीसी) के माध्यम से आम का संग्रहण व विपणन किया जा रहा है। किसान आम और अमरूद की बिक्री जमशेदपुर, सिनी, गम्हरिया सहित आसपास की मंडियों में कर रहे हैं।

किसानों आम बागान में ही करते हैं सब्जियों की खेती

किसानों की आय को निरंतर बनाए रखने के लिए इंटरक्रॉपिंग को बढ़ावा दिया गया. किसान टमाटर, पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकोली, प्याज, मिर्च, भिंडी, आलू और ओल जैसी सब्जियों के साथ अरहर, मसूर, सरसों की खेती करते।

जल संरक्षण पर भी दिया जा रहा जोर

टाटा स्टील फाउंडेशन के वार्डी परियोजना के तहत 379 जलकुंड, कई फार्म तालाब, गहरे बोरवेल, सौर सिंचाई प्रणाली व करीब 100 एकड़ क्षेत्र में माइक्रो ड्रिप सिंचाई व्यवस्था विकसित की गई. इसके अलावा 35 परिवारों को बकरी पालन, 20 परिवारों को कुक्कुट पालन तथा दो परिवारों को सूअर पालन से जोड़ा गया।

कमाई में लगातार बढ़ोतरी, 60 से बढक़र 1.6 लाख तक कमाई

किसानों के अनुसार वर्तमान में करीब पांच लाख किलोग्राम आम का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनके परिवारों की वार्षिक आय 50-60 हजार रुपये से बढक़र 1.3 लाख से 1.6 लाख रुपये तक पहुंच गई है. अब फोकस पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट और वैल्यू एडिशन पर है. किसानों को ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और गुणवत्ता प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही आम एवं ओल के अचार जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

आज बागानों की कमाई से बच्चे प्राप्त कर रहे उच्च शिक्षा: सोनाराम

सरायकेला-खरसावां के रंगामटिया गांव के किसान सोनाराम सोरेन ने कहा कि टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से संचालित आम वाडी परियोजना ने उनके परिवार के अलावा ग्रामीणों की किस्मत बदल दी है. जो उनकी बंजर भूमि थी आज उससे लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले खेती से परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था, लेकिन अब आम, अमरूद व सब्जियों की खेती से नियमित आय हो रही है. उन्होंने कहा कि उन्हें सात एकड़ जमीन है जिनमें से एक एकड़ जमीन में आम व अमरूद के पौधे लगा रखे हैं. सिर्फ आम की बिक्री कर वर्ष में एक लाख रुपये तक कमा लेते हैं अमरूद से भी अच्छी कमाई होती है, जबकि बीच के समय में सब्जियों से आय होती है. उन्होंने कहा कि अन्य जमीन में धान की खेती है लेकिन उसमें मेहनत अधिक है और खर्च भी अधिक होते उसके अनुसार कमाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि उन्हें तीन बच्चे हैं।  पुत्री को ग्रेजुएशन करा रहे है। उन्होंने कहा कि बेटे को भी उच्च शिक्षा दिला रहे है. वहीं गंगा महतो ने कहा उसने ग्रेजुएशन कर रखी है। उसके पति ने एमबीए कर रखा है। उन्होंने कहा कि आम, अमरूद व सब्जियों की खेती से बेहतर कमाई हो रही।  उन्होंने कहा कि गांव में सोलर भी लगा हुआ।

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