इंकैब लिमिटेड से जुड़े मामले में बुधवार को माननीय राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में सुनवाई हुई। मजदूरों की ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने न्यायाधिकरण के समक्ष दावा किया कि 6 जनवरी 2016 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार इंकैब पर बैंकों की कुल देनदारी मात्र 21.63 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 1992 से पूर्व के ऋण थे और वर्ष 1995 के बाद समाप्त हो गए। उन्होंने कहा कि इस आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय की मुहर लगने के बाद यह अंतिम रूप से प्रभावी हो चुका है। मजदूर पक्ष का कहना था कि उक्त स्थिति में केवल मजदूर ही कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) के सदस्य हो सकते हैं। आरोप लगाया गया कि तत्कालीन रिजोल्यूशन प्रोफेशनल शशि अग्रवाल ने कमला मिल्स लिमिटेड, फस्क्वा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड तथा पेगाशस एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के 2,009 करोड़ रुपये के कथित फर्जी दावों को स्वीकार कर उन्हें सीओसी में शामिल कराया, जिसके आधार पर कंपनी के परिसमापन (लिक्विडेशन) का आदेश पारित हुआ।
अधिवक्ता ने बताया कि एनसीएलएटी ने 4 जून 2021 के आदेश में शशि अग्रवाल को पद से हटाया था तथा बाद में आईबीबीआई ने उनकी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल के रूप में पात्रता समाप्त कर दी। उन्होंने कहा कि इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय ने 7 फरवरी 2022 को भी बरकरार रखा। सुनवाई के दौरान यह भी आरोप लगाया गया कि नए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल पंकज टिबरेवाल ने तीन कंपनियों के साथ ट्रॉपिकल वेंचर्स कंपनी लिमिटेड के 3,074 करोड़ रुपये के कथित फर्जी दावों को भी स्वीकार कर नया सीओसी गठित किया। मजदूर पक्ष के अनुसार, एनसीएलएटी ने 30 जून 2026 के आदेश में ट्रॉपिकल वेंचर्स के 1,646 करोड़ रुपये के दावे को अस्वीकार करते हुए केवल 85 करोड़ रुपये के दावे को स्वीकार करने का निर्देश दिया था।
मजदूरों के अधिवक्ता ने न्यायाधिकरण को बताया कि उनके अनुसार 85 करोड़ रुपये का दावा भी फर्जी है तथा इस संबंध में 30 जून 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में सिविल अपील दायर की गई है।मामले में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित अपील का उल्लेख करते हुए एनसीएलएटी की चेयरमैन की खंडपीठ ने मजदूरों की सभी अपीलों पर अगली सुनवाई 5 सितंबर 2026 तक स्थगित कर दी। सुनवाई के दौरान मजदूरों की ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, आकाश शर्मा और ऋषभ रंजन उपस्थित रहे।
