टाटा स्टील में कर्मचारियों के लंबित ग्रेड रिवीजन समझौते को लेकर मंगलवार को कंपनी प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के शीर्ष नेतृत्व के बीच दो चरणों में लंबी वार्ता हुई, लेकिन एमजीबी (मिनिमम गारंटीड बेनिफिट) और डीए पर पॉइंट वैल्यू जैसे अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बरकरार रहने से कर्मचारियों की निगाहें अब अगली बैठक पर टिक गई हैं।
जानकारी के अनुसार, पहली बैठक सुबह 9.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक चली, जबकि दूसरा दौर शाम 4 बजे से 6.30 बजे तक आयोजित किया गया। करीब छह घंटे से अधिक समय तक चली बातचीत के बावजूद प्रमुख मुद्दों पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका।
एमजीबी और डीए पर बनी हुई है खींचतान
ग्रेड रिवीजन वार्ता में सबसे बड़ा पेंच एमजीबी और डीए पर पॉइंट वैल्यू को लेकर फंसा हुआ है। यूनियन कर्मचारियों के लिए 13 प्रतिशत एमजीबी की मांग पर कायम है, जबकि कंपनी प्रबंधन 7.5 प्रतिशत से अधिक देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है। इसी तरह डीए पर पॉइंट वैल्यू को लेकर यूनियन ने 6 रुपये की मांग रखी है, जबकि प्रबंधन फिलहाल 3 रुपये के प्रस्ताव पर अड़ा हुआ है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिसके कारण समझौते का रास्ता अभी साफ नहीं हो पाया है।
सात वर्ष की अवधि पर लगभग सहमति
सूत्रों के मुताबिक, ग्रेड रिवीजन की अवधि को लेकर ज्यादा मतभेद नहीं है। इस बार भी समझौते की अवधि सात वर्ष रहने की संभावना प्रबल मानी जा रही है। यूनियन सूत्रों का कहना है कि एमजीबी और डीए पर सहमति बनते ही अन्य भत्तों और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान आसानी से हो सकता है।
बताया जा रहा है कि एलाउंस और अन्य सुविधाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई बड़ा विवाद नहीं है। ऐसे में मुख्य अड़चन केवल एमजीबी और डीए पर पॉइंट वैल्यू को लेकर बनी हुई है।
शीर्ष नेतृत्व रहा मौजूद
वार्ता में कंपनी प्रबंधन की ओर से सीएचआरओ जुबिन पालिया और राहुल दुबे शामिल हुए। वहीं टाटा वर्कर्स यूनियन की ओर से अध्यक्ष संजीव चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह तथा महामंत्री सतीश सिंह ने हिस्सा लिया।
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत का दौर जारी है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि आगामी बैठकों में गतिरोध समाप्त होगा और लंबे समय से लंबित ग्रेड रिवीजन समझौते पर सहमति बन सकेगी।
