अक्सर लोग ब्लड प्रेशर की सामान्य रीडिंग देखकर यह निश्चिंत हो जाते हैं कि उनका दिल पूरी तरह स्वस्थ है, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि नॉर्मल बीपी वाले व्यक्ति को भी गंभीर हार्ट अटैक आ सकता है क्योंकि हृदय स्वास्थ्य का दायरा केवल ब्लड प्रेशर तक सीमित नहीं है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मुख्य रूप से कोरोनरी धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल के फटने से अचानक खून का थक्का जमना और ब्लड फ्लो बाधित होना हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बनता है, जिसका बीपी की सामान्य स्थिति से कोई सीधा बचाव नहीं होता। इसके अतिरिक्त धमनियों में संकुचन, रक्त वाहिकाओं में अपने आप फाड़ होना, गंभीर एनीमिया, अचानक बीपी बहुत कम हो जाना, दिल की ऑक्सीजन मांग और आपूर्ति में असंतुलन, साथ ही डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास जैसी स्थितियां भी इस खतरे को बढ़ा देती हैं। डॉक्टरों ने इस बात से भी आगाह किया है कि हार्ट अटैक के वक्त हमेशा ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिले ऐसा जरूरी नहीं है, कई मामलों में शुरुआती या हल्के दौरे के समय बीपी पूरी तरह सामान्य रहता है, इसलिए जोखिम वाले लोगों को नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की व्यापक जांच करवाते रहना चाहिए।
