दिवाली के खास मौके पर बनने वाली पारंपरिक मिठाइयां और पकवान इस त्योहार की शान होते हैं, मगर इनके अति सेवन से डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्लड शुगर को मैनेज करना बेहद मुश्किल हो जाता है क्योंकि त्योहारी खान-पान में छिपा कार्बोहाइड्रेट और शुगर शरीर में ग्लूकोज के स्तर को तेजी से बढ़ा देता है। फोर्टिस मानेसर के विशेषज्ञ डॉक्टर अनु मैथ्यू का कहना है कि इस मौसम में व्रत और फिर अत्यधिक खान-पान के चक्र के कारण ब्लड शुगर अचानक कम या ज्यादा होने का गंभीर जोखिम रहता है, जिससे डायबिटिक कीटोएसिडोसिस जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है, अतः कार्बोहाइड्रेट का सेवन हमेशा प्रोटीन और फाइबर के साथ मिलाकर करना समझदारी है। डॉक्टर मैथ्यू ने यह भी आगाह किया कि शुगर-फ्री विकल्प भी पूरी तरह से जोखिम मुक्त नहीं होते हैं, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को दिन में दो-तीन बार अपना शुगर लेवल चेक करते रहना चाहिए, व्रत की योजना डॉक्टर की सलाह से बनानी चाहिए और टाइप-1 मरीजों को अपनी इंसुलिन की खुराक कभी नहीं छोड़नी चाहिए। त्योहार के आनंद के बीच अपनी सेहत का ख्याल रखने के लिए यह आवश्यक है कि मिठाइयों को हमेशा खाने के बाद ही खाया जाए और भोजन के बाद थोड़ी देर टहलने के नियम का पालन किया जाए ताकि शुगर पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
