भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादमी व एलबीएसएस कॉलेज की ओर से कॉलेज परिसर में पुस्तक प्रदर्शनी आयोजित की गई जिसका उद्घाटन मुख्य अतिथि कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. रंजीत कुमार कर्ण ने किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि कोल्हान विश्वविद्याल के कुलसचिव डा. रंजीत कुमार कर्ण ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को पढऩे के लिए प्रेरित करते हैं. उन्होंने कहा कि किताबें ज्ञान को विस्तृत करती हैं व मस्तिष्क को एक्टिवेट करती हैं। रील वगैरह देखने से मस्तिष्क का विकास नहीं होता. किताबों को हम पढऩे के साथ जीते भी है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान को भी साहित्य की तरह रुचिकर बनाने की कोशिश करनी चाहिए. पुस्तकालयों में विज्ञान की पर्याप्त पुस्तकें होनी चाहिए. एलबीएसएम कॉलेज के प्राचार्य डा. अशोक कुमार झा ने कहा कि यह आयोजन पुस्तकों से जुडऩे का विशिष्ट आयोजन है. ऐसी प्रदर्शनी ज्ञान के विकास में सहयोगी सिद्ध होगी. उन्होंने संस्कृति मंत्रालय और साहित्य अकादेमी के सचिव डा. गुलाटी व क्षेत्रीय उपसचिव देवेंद्र कुमार देवेश के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने उम्मीद की जतायी कि आगे वृहद स्तर पर एक बहुभाषीय कवि गोष्ठी आयोजित की जाएगी।
इस आयोजन में हिन्दी, मैथिली, संताली, बांग्ला, अंग्रेजी आदि भाषाओं की करीब 20,000 रुपये मूल्य की पुस्तकें बिकीं. सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी में करीब 700 छात्रों ने भाग लिया. कार्यक्रम का संचालन डा. विनय कुमार गुप्ता ने किया. इस मौके पर घाटशिला कॉलेज के प्राचार्य डा. आर के. चौधरी, कोल्हान विश्वविद्यालय के उडिय़ा विभाग के अध्यक्ष डा. बालकृष्ण बेहरा, मैथिली की कवि नूतन झा, मगध सम्राट हॉस्पिटल की निदेशक डा. ज्योति सिंह, साहित्य अकादेमी के सायंतन घोष, सनत बोस, ललन चौधरी, मोहन ठाकुर, डा. मौसमी पॉल, डा. सुस्मिता धारा, डा. विजय प्रकाश, डा. अजय कुमार वर्मा, प्रो. पुरुषोत्तम प्रसाद, प्रो. संतोष कुमार राम, डा. दीपंजय श्रीवास्तव, प्रो. अरविन्द पंडित, प्रो. रितु, डा. शबनम परवीन, डा. प्रशांत, प्रो. सलोनी रंजने, डा. सुधीर कुमार, प्रो. प्रमिला किस्कू, प्रो. शिप्रा वोयपाई, प्रो. बाबूराम सोरेन, हरिहर टुडू, रामप्रवेश यादव, अजय वर्मा आदि मौजूद थे।
डॉ. संतोष कुमार की पुस्तक ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ का विमोचन
कोल्हान विश्वविद्याल के कुलसचिव डा. रंजीत कुमार कर्ण ने डा. संतोष कुमार की लिखित एनईपी सिलेबस आधारित वी ए सी -1 की पुस्तक ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ का विमोचन किया गया. रजिस्ट्रार डा. रंजीत कर्ण ने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी पुस्तक को रेफरेंस के रूप में सिलेबस में जोडऩा चाहिए. ज्ञातव्य हो कि डा. संतोष कुमार एनईपी सिलेबस आधारित 30 पुस्तकों के लेखन पूरा कर चुके हैं। कॉलेज को कीे दो पुस्तकें भेंट मैथिली-बांग्ला के साहित्यकार अमरनाथ झा ने अपनी रचित संग्रहित व बांग्ला में अनुदित ‘विद्यापति गीत रत्नाकर’ व ‘मैथिली कथा शताब्दी संचयन’ एल. बी-एस. एम. कॉलेज की लाइब्रेरी के लिए भेंट की।
