June 18, 2026
bihar

सीएसआईआर- एनएमएल के निदेशक डा. संंदीप घोष चौधरी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की पुनप्र्राप्ति व पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) जरूरी है. उन्होंने भारत की संसाधन सुरक्षा व औद्योगिक आत्मनिर्भरता के लिए इसे अत्यंत आवश्यक बताते हुए कहा कि रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा व उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में उपयोग होने वाले कई महत्वपूर्ण खनिज औद्योगिक स्क्रैप, ई-कचरे व अनुपयोगी उपकरणों से प्राप्त किए जा सकते हैं बुधवार को सीएसआईआर-एनएमएल में शुरू हुए तीन दिवसीय राट्रीय संगोष्टी ‘बिहाइंड द टीचर्स डेस्क (बीटीटीडी-2026)’ के उद्घाटन समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डा. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में रिसाइक्लिंग और संसाधनों की पुनप्र्राप्ति भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. उन्होंने टंगस्टन का उदाहरण देते हुए बताया कि यह रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण खनिज है, लेकिन भारत में इसका अयस्क सीमित मात्रा में उपलब्ध है। खदानों के अवशेष (टेलिंग्स) में टंगस्टन की मात्रा जहां करीब 0.02 प्रतिशत होती है, वहीं टंगस्टन स्क्रैप में इसकी मात्रा करीब 20 प्रतिशत तक पायी जाती है. इसलिए स्क्रैप से टंगस्टन निकालना अधिक व्यावहारिक व किफायती विकल्प है।

उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-एनएमएल ने टंगस्टन कार्बाइड स्क्रैप से टंगस्टन निकालने की तकनीक विकसित कर ली है और इसे तीन औद्योगिक इकाइयों को हस्तांतरित भी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अब उद्योग इस तकनीक के व्यावसायिक उपयोग की दिशा में कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला उपयोग किए जा चुके मैग्नेट, औद्योगिक उत्पादों तथा अन्य अपशिष्ट सामग्रियों से मूल्यवान तत्वों की पुनर्प्राप्ति पर भी काम कर रही है. कई रणनीतिक खनिज केवल कुछ देशों में उपलब्ध हैं, इसलिए भारत के लिए रिसाइक्लिंग एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में सोलर पैनल अपनी उपयोग अवधि पूरी कर लेंगे. ऐसे पैनलों से सिलिकॉन, चांदी और अन्य महत्वपूर्ण तत्वों को निकालकर पुन: नए सोलर पैनलों के निर्माण में उपयोग किया जा सकता है. इस दिशा में एनएमएल विशेष परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है।  उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में उपयोग होने वाले एलईडी स्क्रीन, डिजिटल साइनबोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले सिस्टमों से भविष्य में उत्पन्न होने वाले ई-कचरे की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि इन उपकरणों में इंडियम सहित कई मूल्यवान तत्व मौजूद होते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक तरीकों से पुनर्प्राप्त किया जा सकता है।

एमएसएमई को तकनीकी समास्याओं का समाधान कराने का लक्ष्य उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के संदर्भ में एनएमएल आदित्यपुर सहित अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों के उद्योग संगठनों के साथ लगातार संवाद कर रहा है. संस्थान का विशेष फोकस सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की तकनीकी समस्याओं का समाधान करना और उन्हें विकसित तकनीकों का लाभ उपलब्ध कराना है. उन्होंने उद्योगों व स्टार्टअप्स से एनएमएल की विकसित तकनीकों का फायदा उठाने की अपील करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों और ई-कचरे का पुनर्चक्रण सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि देश के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है। उन्होंने कहा कि संसाधनों की वैज्ञानिक पुनर्प्राप्ति और रिसाइक्लिंग भारत की संसाधन सुरक्षा को मजबूत करने, विनिर्माण क्षेत्र को गति देने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि प्रयोगशाला की तकनीकें देश के 16 राज्यों तक पहुंच चुकी हैं।  उन्होंने कहा कि अधिकांश घरों में पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फेंकने के बजाय सुरक्षित रख दिया जाता है, जिससे उनमें मौजूद मूल्यवान धातुएं व खनिज पुनर्चक्रण की प्रक्रिया से बाहर रह जाते हैं।  उन्होंने कहा कि ई-कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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