टाटा स्टील के लंबित वेतन समझौते को लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के पदाधिकारियों में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है. बुधवार को टाटा वर्कर्स यूनियन के डिप्टी प्रेसीडेंट शैलेश सिंह के कार्यालय में आयोजित बैठक में पदाधिकारियों ने शीर्ष नेतृत्व से प्रबंधन के समक्ष कड़ा रुख अपनाने की मांग की। बैठक में डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह ने यूनियन के आठ पदाधिकारियों को वेतन समझौता वार्ता की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि टाटा स्टील प्रबंधन आठ वर्ष की समझौता अवधि व 7.50 प्रतिशत मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (एमजीबी) के प्रस्ताव पर कायम है। इस मुद्दे पर सहमति बनने के बाद ही न्यू सीरीज ग्रेड के कर्मचारियों के एमजीबी पर चर्चा आगे बढ़ सकेगी।
इस दौरान पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि लगभग 18 माह से वेतन समझौता लंबित है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है. उन्होंने कहा कि यदि प्रबंधन कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रहा है और यूनियन की मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपना रहा है, तो शीर्ष नेतृत्व को वार्ता से बाहर आने पर भी विचार करना चाहिए। पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि यूनियन नेतृत्व कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए जो भी निर्णय लेगा, वे उसके साथ खड़े रहेंगे. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछली बार की तरह कर्मचारियों के लिए प्रतिकूल समझौता स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक में कुछ पदाधिकारियों ने न्यू सीरीज और ओल्ड सीरीज कर्मचारियों के वेतन ढांचे में मौजूद अंतर का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि न्यू सीरीज कर्मचारियों का वेतन अपेक्षाकृत कम है, इसलिए उनके हितों को ध्यान में रखते हुए अलग से चर्चा की जानी चाहिए। साथ ही वेतन समझौते की अवधि पांच से छह वर्ष रखने की मांग भी रखी गई. शैलेश सिंह ने पदाधिकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी चिंताओं और सुझावों को प्रबंधन के समक्ष रखा जाएगा व कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। इस मौके पर यूनियन के वाइस प्रेसीडेंट एस आलम, संजय सिंह, संजीव तिवारी, राजीव चौधरी, असिस्टेंट सेक्रेट्री नितेश राज, अजय चौधरी, श्याम बाबू , ट्रेजरर अमोद दुबे मौजूद थे।
