July 30, 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का सातवां दिन भारत के लिए बेहद खास और यादगार रहा। पैरा एथलेटिक्स के ट्रैक पर 23 वर्षीय भारतीय धावक दिलीप महादु गावित ने शानदार प्रदर्शन करते हुए T47 कैटेगरी की 100 मीटर स्प्रिंट रेस में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इसी मुकाबले में भारत के मोहम्मद बेसिल ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीतकर देश की खुशी को दोगुना कर दिया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का तीसरा गोल्ड मेडल है। इस जीत के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है।

29 जुलाई की रात ग्लासगो के स्कॉटस्टन स्टेडियम में पैरा एथलेटिक्स की T47 कैटेगरी 100 मीटर फाइनल रेस आयोजित हुई। इस मुकाबले में भारत के दिलीप गावित और मोहम्मद बेसिल दोनों पदक की दौड़ में शामिल थे। पहली बार किसी बड़े स्प्रिंट मुकाबले में दो भारतीय खिलाड़ियों का एक साथ फाइनल में उतरना खास उपलब्धि रही।

रेस की शुरुआत भारत के लिए आसान नहीं रही। इंग्लैंड के केविन सैंटोस और भारत के मोहम्मद बेसिल ने तेज शुरुआत करते हुए शुरुआती बढ़त बना ली थी। लेकिन दिलीप गावित ने आखिरी समय तक हार नहीं मानी। अंतिम 30 मीटर में उन्होंने अपनी रफ्तार बढ़ाते हुए शानदार वापसी की और पांचवें स्थान से आगे निकलकर सभी धावकों को पीछे छोड़ दिया।

दिलीप गावित ने 10.71 सेकेंड के समय के साथ फिनिश लाइन पार कर गोल्ड मेडल जीता और T47 कैटेगरी में नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड भी बनाया। वहीं सिल्वर मेडल के लिए मोहम्मद बेसिल और इंग्लैंड के केविन सैंटोस के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, जिसमें फोटो फिनिश के बाद भारतीय खिलाड़ी बेसिल को विजेता घोषित किया गया।

महाराष्ट्र के नासिक जिले के रहने वाले दिलीप महादु गावित की सफलता की कहानी प्रेरणा से भरी हुई है। बचपन में एक हादसे में उन्होंने अपना दायां हाथ गंवा दिया था। पेड़ से गिरने के बाद उनकी हालत गंभीर हो गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा।

एक हाथ के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए भी दिलीप ने अपने सपनों को नहीं छोड़ा। उन्होंने एथलेटिक्स को अपना लक्ष्य बनाया और कड़ी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाई। स्थानीय कोच के मार्गदर्शन में उन्होंने स्प्रिंटिंग शुरू की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाई। साल 2019 में वह खेलो इंडिया गेम्स में महाराष्ट्र टीम का हिस्सा भी रहे।

दिलीप गावित के करियर में बड़ा बदलाव साल 2023 में आया, जब उन्होंने चीन के हांगझू में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए T47 कैटेगरी की 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदली और 400 मीटर के बजाय 100 मीटर स्प्रिंट पर अधिक ध्यान देना शुरू किया। उनका यह फैसला अब सफलता की नई कहानी लिख रहा है। पैरा एशियन गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीतकर दिलीप गावित ने साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत से हर चुनौती को मात दी जा सकती है।

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