टाटा स्टील में हाल ही में हुए वेतन समझौते के बाद कर्मचारियों की बंचिंग (Bunching) से उत्पन्न विसंगतियों को लेकर मंगलवार को टाटा वर्कर्स यूनियन और प्रबंधन के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में यूनियन पदाधिकारियों ने बंचिंग के स्वरूप, इसके प्रकार और इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों की संख्या की जानकारी प्रबंधन से मांगी। प्रबंधन ने संशोधित वेतन संरचना के कारण बंचिंग की स्थिति बनने और कुछ मामलों में कर्मचारियों की इंक्रीमेंट डेट आगे खिसकने के कारणों की विस्तार से जानकारी दी। प्रबंधन के अनुसार, इस समस्या से करीब 2,000 कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं।
1978 से चली आ रही है समस्या
बैठक में यह बात भी सामने आई कि बंचिंग की समस्या नई नहीं है, बल्कि वर्ष 1978 से चली आ रही है। ऐसे में यूनियन ने इसे केवल मौजूदा वेतन समझौते से जुड़ी समस्या न मानते हुए दीर्घकालिक और संरचनात्मक मुद्दा बताया। यूनियन का मानना है कि इसका ऐसा स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए, जिससे भविष्य के वेतन समझौतों में भी बंचिंग की स्थिति उत्पन्न न हो।
बिना अतिरिक्त वित्तीय भार के समाधान पर जोर
विस्तृत चर्चा के बाद तय किया गया कि बंचिंग के समाधान के लिए यूनियन पदाधिकारी ऐसे व्यावहारिक और तार्किक सुझाव देंगे, जिनसे कंपनी पर अतिरिक्त वित्तीय भार न पड़े। इन सुझावों पर Anomalies Committee (विसंगति समिति) में विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। यूनियन का प्रयास है कि मौजूदा बंचिंग समस्या का समाधान करने के साथ ही भविष्य के वेतन समझौतों में ऐसी विसंगति दोबारा पैदा न हो। इसके लिए व्यवहारिक और टिकाऊ व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। बैठक में टाटा स्टील प्रबंधन की ओर से जुबिन पालिया, राहुल दुबे, उत्कर्ष और सरदुल विक्रम समेत अन्य अधिकारी तथा टाटा वर्कर्स यूनियन के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। यूनियन ने कहा कि कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बंचिंग का न्यायसंगत, व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकालना प्राथमिकता है।
