August 8, 2026
High-Efficiency-Digestion-Biogas-Production-Plant

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को बताया कि ‘गोवर्धन’ योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) को देश में स्वच्छ ऊर्जा के एक विकल्प के रूप में बढ़ावा देना है। इसके तहत कृषि अवशेष, पशुओं का गोबर, गन्ने की खोई, शहरी जैविक कचरे और अन्य जैविक सामग्री से बायोगैस तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इससे कचरे का बेहतर उपयोग होने के साथ किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

‘गोवर्धन’ योजना के तहत जैविक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने पर खास ध्यान दिया जाएगा। अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद तैयार करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य देश में कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी सीबीजी का उत्पादन बढ़ाना है। इससे कचरे का उपयोग सुनिश्चित करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।

योजना का सीधा लाभ उन क्षेत्रों को मिल सकता है, जहां कृषि अवशेष और पशुओं का गोबर बड़ी मात्रा में उपलब्ध होता है। इन सामग्रियों को बेकार छोड़ने के बजाय बायोगैस और जैविक खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों की आय बढ़ाने के साथ कचरे का बेहतर प्रबंधन भी संभव होगा। यानी खेतों और गांवों से निकलने वाली जैविक सामग्री को सिर्फ कचरा मानने के बजाय उससे आर्थिक लाभ हासिल करने का रास्ता तैयार होगा।

‘गोवर्धन’ योजना के तहत कई प्रकार की जैविक सामग्री को उपयोग में लाया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • कृषि अवशेष
  • पशुओं का गोबर
  • गन्ने की खोई
  • शहरी जैविक कचरा
  • अन्य जैविक सामग्री

इन जैविक स्रोतों से स्वच्छ ईंधन के साथ जैविक खाद तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा। इसी बीच, केंद्र सरकार ने असम में 8,970 करोड़ रुपये की लागत से 136 किलोमीटर लंबे गुवाहाटी-तेजपुर चार लेन राजमार्ग को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना में बाइपास, पुल, फ्लाईओवर और आपातकालीन लैंडिंग सुविधा शामिल होगी। परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में सरकार जरूरी सुविधाएं, तकनीकी सहायता और आकर्षक कीमत उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी। खास बात यह है कि राजमार्ग परियोजना को मंजूरी देने के साथ सरकार ने ‘गोवर्धन’ योजना के जरिए जैविक कचरे के इस्तेमाल और किसानों व ग्रामीण क्षेत्रों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

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