सीआईआई झारखंड की ओर से जमशेदपुर में “एडवांसिंग वर्कप्लेस सेफ्टी : रिस्क, लाइन ऑफ फायर एंड बिहेवियर” विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें विभिन्न उद्योगों के सुरक्षा विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लेकर कार्यस्थल पर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत बनाने पर विचार साझा किए। कार्यशाला के दौरान सीआईआई झारखंड सेफ्टी पैनल के संयोजक एवं टाटा स्टील के चीफ–सेफ्टी नीरज कुमार सिन्हा ने कहा कि सुरक्षा केवल नियम नहीं, बल्कि एक सोच है। उन्होंने वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग नहीं करने, सीट बेल्ट लगाने तथा मनोवैज्ञानिक सुरक्षा (साइकोलॉजिकल सेफ्टी) को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को बिना भय के जोखिम और समस्याओं की जानकारी देने का माहौल मिलना चाहिए। उनका कहना था कि “सुरक्षा एक ऐसी यात्रा है जिसकी कोई मंजिल नहीं होती।”
टाटा स्टील के ईएचएस सीनियर मैनेजर सुकिश झा ने ‘लाइन ऑफ फायर’ से जुड़े जोखिमों की जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी कार्य से पहले संभावित खतरों की पहचान, सुरक्षित स्थिति बनाए रखना और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए बेहद जरूरी है। वहीं बसेरा एम्पावरमेंट (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक चंद्रा शरण ने कहा कि कार्यस्थल की सुरक्षा व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से शुरू होती है। उन्होंने नियमित व्यायाम, योग, सकारात्मक सोच, तनाव प्रबंधन तथा परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने की सलाह देते हुए स्वस्थ कार्य-जीवन संतुलन बनाए रखने पर बल दिया।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कहा कि केवल नियमों का पालन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जोखिम की पहचान, अनुशासित कार्यशैली, मनोवैज्ञानिक सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य को भी सुरक्षा संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। इससे सुरक्षित, स्वस्थ और बेहतर कार्यस्थल का निर्माण संभव हो सकेगा।
