June 2, 2026
BIHAR (1)

सीएसआईआर-एनएमएल में ई-कचरा रिसाइक्लिंग के क्षेत्र में असंगठित कामगारों की क्षमता वृद्धि व उन्हें संगठित क्षेत्र से जोडऩे के उद्देश्य से मास्टर ट्रेनर्स के लिए एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार से शुरू हो गया. कार्यक्रम का उद्देश्य ई-कचरे के वैज्ञानिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन को बढ़ावा देना है. विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में ई-कचरा प्रबंधन की सबसे बड़ी चुनौती असंगठित क्षेत्र में होने वाली अवैज्ञानिक रिसाइक्लिंग है, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है. ऐसे में असंगठित क्षेत्र को वैज्ञानिक तकनीक, प्रशिक्षण और सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है. सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिकों के अनुसार यह पहल पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के पुन: उपयोग, रोजगार सृजन और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. साथ ही यह देश में टिकाऊ एवं प्रभावी ई-कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

सीएसआईआर-एनएमएल मं आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन एनएमएल के निदेश डा. संदीप घोष चौधरी, मुख्य वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रमुख डा. मनीष कुमार झा, एमईआर प्रमुख डा. संजय कुमार व आरपीबीडी प्रमुख डॉ. एस.के. पाल की उपस्थिति में किया गया. प्रशिक्षण में टेरी व रीकार्ट के मास्टर ट्रेनर्स सहित वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की टीम भाग ले रही है. प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टेलीविजन, बैटरी, तार एवं प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) समेत अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले ई-कचरे के संग्रहण, छंटाई, पृथक्करण और रिसाइक्लिंग की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी. साथ ही खुले में ई-कचरा जलाने और रसायनों के अनियंत्रित उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।

सीएसआईआर एनएमएल के वैज्ञानिक डा. मनीष कुमार झा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम प्रतिभागियों को पीसीबी और अन्य ई-कचरा सामग्री से कॉपर, एल्युमिनियम, सिल्वर और गोल्ड जैसी मूल्यवान धातुओं की रिकवरी की व्यावहारिक तकनीकों का प्रशिक्षण देगी. कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया जा रहा है कि ई-कचरा केवल कचरा नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण द्वितीयक संसाधन और रोजगार का अवसर है. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इन्फॉर्मल सेक्टर कैपेसिटी बिल्डिंग अपग्रेडेशन विद फॉर्मेशन ऑफ रिसाइक्लिंग क्लस्टर्स एंड एनेबलिंग टेक्नोलॉजी फॉर रिकवरी ऑफ रिसोर्सेज फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट परियोजना के तहत आयोजित किया जा रहा है. परियोजना के तहत देशभर में 15 हजार असंगठित कामगारों को प्रशिक्षण देने, 50 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने, 75 ई-कचरा क्लस्टर विकसित करने तथा 30 एमएसएमई क्लस्टरों को संगठित स्वरूप प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में 300 कार्यशालाओं के माध्यम से ई-कचरा प्रबंधन, संसाधन दक्षता और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जाएगा।

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