टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस के हालिया आंकड़ों ने विश्व स्वास्थ्य दिवस पर भारत में बढ़ती बीमारियों और उनके इलाज के लिए अपर्याप्त आर्थिक तैयारी पर चिंता जताई है। सर्वेक्षण के अनुसार, ५९% डॉक्टरों का मानना है कि हृदय रोग से पीड़ित ४०% से भी कम मरीज उन्नत उपचार का खर्च वहन कर पाते हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि २०२५ में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में दोगुनी वृद्धि हुई है, जिसमें ८५% मामलों का मुख्य कारण धूम्रपान रहा है। इसके साथ ही, प्रदूषण और सेकंड-हैंड स्मोकिंग भी स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा रहे हैं, जबकि अस्पतालों के खर्च में औसतन २७% की वृद्धि दर्ज की गई है।
रिपोर्ट में महिलाओं की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है; बीमाधारकों में उनकी हिस्सेदारी लगभग आधी होने के बावजूद, केवल २०% महिलाओं के पास ही पर्याप्त स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, नियमित जांच और पर्याप्त बीमा कवर को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि चिकित्सा लागत में भारी वृद्धि के कारण अब केवल बचत के भरोसे रहना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए वित्तीय सुरक्षा के लिए सही स्वास्थ्य बीमा का होना अनिवार्य है।
