संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की-मून अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे। उनके इस दौरे को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि उनके कार्यक्रम को लेकर विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि वे भारत में विभिन्न स्तरों पर कुछ औपचारिक और रणनीतिक बैठकों में हिस्सा ले सकते हैं। बान की-मून का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा तेज है। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र की 80वीं अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक भी भारत के आधिकारिक दौरे पर आने वाली हैं। उनके प्रवक्ता कॉलिन्स ने जानकारी दी कि वे दिल्ली में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगी और विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा कर सकती हैं। इसके साथ ही एनालेना बेयरबॉक चीन का भी दौरा करेंगी, जहां वे वहां के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करेंगी। एनालेना बेयरबॉक का यह भारत दौरा उनके संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष बनने के बाद पहला आधिकारिक दौरा होगा। इससे पहले वह जर्मनी की विदेश मंत्री के रूप में भारत का दौरा कर चुकी हैं, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर भारतीय नेतृत्व के साथ चर्चा की थी। इस बार उनके दौरे को संयुक्त राष्ट्र और भारत के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में देखा जा रहा है।वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस पहले ही भारत के साथ सक्रिय संपर्क में रहे हैं। पिछले वर्ष फरवरी में उन्होंने दिल्ली में आयोजित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में भाग लिया था। इस सम्मेलन में वैश्विक तकनीकी विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और उससे जुड़े नैतिक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच पिछले कुछ वर्षों में संवाद और सहयोग में बढ़ोतरी देखी गई है। पर्यावरण, तकनीक, शांति स्थापना और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों के बीच लगातार बातचीत जारी है। ऐसे में बान की-मून और एनालेना बेयरबॉक के भारत दौरे को भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उच्च स्तरीय दौरे वैश्विक नीति निर्माण और बहुपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को लगातार बढ़ा रहा है, ऐसे में इन बैठकों से कई अहम मुद्दों पर सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। इस दौरे को लेकर कूटनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज है और सभी की नजरें इन बैठकों में होने वाली बातचीत और संभावित समझौतों पर टिकी हुई हैं।
