टाटा स्टील ने एसएमएस ग्रुप जीएमबीएच का हिस्सा पॉल वर्थ एस ए लक्समबर्ग के साथ विश्व की पहली ईजीमेल्ट तकनीक को लागू करने के लिए समझौता किया है. टाटा स्टील जमशेदपुर स्थित अपने ई ब्लास्ट फर्नेस 649 घन मीटर में इस तकनीक का पहला औद्योगिक प्रदर्शन चरणबद्ध तरीके से करने की योजना बना रही है. इस परियोजना का उद्देश्य वर्तमान संचालन की तुलना में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 50 प्रतिशत से अधिक कम करना है।
टाटा स्टील व एसएमएस ग्रुप ने जून, 2023 में आयरन मेकिंग प्रक्रिया को डिकार्बोनाइज करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. शुरुआत की अध्ययन के सफल होने के बाद अब इस परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. यह पहल टाटा स्टील के 2045 तक नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो वैश्विक स्तर पर सबसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य में से एक है। टाटा स्टील व एसएमएस ग्रुप पॉल वर्थ मिलकर इस तकनीक के विकास व कार्यान्वयन पर काम करेंगे।
टाटा स्टील तकनीक व नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रहा: नरेन्द्रन
टाटा स्टील के सीईओ व ग्लोबल प्रबंध निदेशक टी वी नरेन्द्रन ने कहा कि कम कार्बन स्टील उत्पादन की दिशा में बदलाव हमारी मौजूदा उत्पादन प्रणाली को नए तरीके से सोचने व बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगा. उन्होंने कहा कि टाटा स्टील तकनीक नवाचार व मजबूत साझेदारी के माध्यम से इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है व एसएमएस ग्रुप के साथ सहयोग इस यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है. वहीं एसएमएस ग्रुप के सीईओ जोचेन बर्ग ने कहा कि टाटा स्टील का विश्वास हमारे लिए महत्वपूर्ण है व इससे हमें अपनी ईजीमेल्ट तकनीक को वास्तविक रूप देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक स्तर पर पहली ईजीमेल्ट परियोजना भविष्य में पुराने संयंत्रों के डिकार्बोनाइजेशन का मार्ग प्रशस्त करेगी।
