भारतीय शेयर बाजार वर्तमान में एक ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है, जिसका मुख्य आधार देश के ४ करोड़ सक्रिय एसआईपी निवेशक हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये निवेशक हर महीने म्यूचुअल फंड के माध्यम से बाजार में लगभग २३,००० करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं, जिसने विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के बावजूद बाजार को स्थिरता प्रदान की है। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले ५ वर्षों में खुदरा निवेशकों की भागीदारी में ७५ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, विशेषज्ञ अब इस सवाल पर विचार कर रहे हैं कि यदि अर्थव्यवस्था में मंदी आती है और ये ४ करोड़ लोग अपना निवेश रोक देते हैं, तो क्या भारतीय बाजार इस झटके को सह पाएगा?
विश्लेषण बताता है कि वर्तमान में कुल बाजार पूंजीकरण का लगभग १५ प्रतिशत हिस्सा घरेलू म्यूचुअल फंडों के पास है। यदि एसआईपी प्रवाह में ३०-४० प्रतिशत की भी गिरावट आती है, तो यह शेयर बाजार में ५,००० से अधिक अंकों की गिरावट का कारण बन सकता है। हालांकि, सकारात्मक पक्ष यह है कि ८० प्रतिशत से अधिक एसआईपी धारक दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ निवेश कर रहे हैं, जो बाजार के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ का काम करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही बाजार में थोड़े समय के लिए उतार-चढ़ाव आए, लेकिन इन ४ करोड़ निवेशकों का अटूट विश्वास भारतीय अर्थव्यवस्था को भविष्य में १० ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की ओर ले जाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।
