मणिपुर के शिरुई गाँव में पहली बार लुप्तप्राय ढोल (यानी एशियाई जंगली कुत्ते) को देखा गया है, जो वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। ‘एनवायरनमेंटल फ़ोर्स एट ग्रासरूट लेवल’ (ENFOGAL) के सर्वे के दौरान कैमरा ट्रैप में कैद हुई यह खोज शिरुई के दर्ज वन्यजीवों में एक नई प्रजाति को जोड़ती है और यहाँ के जंगलों के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करती है। ENFOGAL के अनुसार, शिरुई की पहाड़ियों में ढोल की खोज स्थानीय निवासियों की उस धारणा को चुनौती देती है कि ये शिकारी जानवर यहाँ नहीं पाए जाते थे। संरक्षणवादी इनकी मौजूदगी को एक स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानते हैं, जहाँ शिकार की प्रचुरता है और इंसानी दखल कम है।
सर्वे में स्थानीय लोगों का भरपूर सहयोग मिला, खासकर पूर्व शिकारी और संरक्षणवादी पमरेइथिंग का, जिन्होंने कैमरा ट्रैप लगाने की जगहों की पहचान करने में मदद की। IUCN की रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) के तौर पर सूचीबद्ध ढोल की मौजूदगी, जैव-विविधता हॉटस्पॉट के रूप में शिरुई के महत्व को उजागर करती है और आगे वैज्ञानिक सर्वे की आवश्यकता पर ज़ोर देती है। इस क्षेत्र के वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उखरुल वन प्रभाग के संरक्षण प्रयास, जैसे कि COSFOM प्रोजेक्ट के तहत सामुदायिक गश्त, अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
