होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति संकट के कारण भारतीय तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ रहा है। १४ अप्रैल २०२६ की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखी गई हैं, जिससे कंपनियों पर ‘अंडर-रिकवरी’ का बोझ बढ़ गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मौजूदा स्थिति में तेल कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर ₹४ से ₹६ और डीजल पर ₹७ से ₹९ तक का नुकसान हो रहा है, जो उनकी वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती है।
इस संकट का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई दर पर पड़ने की आशंका है। चूंकि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग २०% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए आपूर्ति में किसी भी बाधा से आयात लागत में भारी वृद्धि होती है। यदि कच्चे तेल की कीमतें $९५ प्रति बैरल के पार बनी रहती हैं, तो सरकार पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का दबाव बढ़ेगा। इसके अलावा, डीजल की बढ़ती लागत के कारण माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिससे खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में ५% से ८% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
