साहित्यिक संस्था ‘हुलास’ की ओर से रविवार को कदमा में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. तपती व उमस भरी गर्मी के बीच आयोजित इस साहित्यिक समारोह ने शब्दों की संवेदना और काव्य की शीतलता से भाव-विभोर कर दिया. कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना से हुई, जिसकी भावपूर्ण प्रस्तुति विजय नारायण सिंह ‘बेरुका’ ने दी. संस्था का परिचय पूर्व अध्यक्ष धनपत चावला ने प्रस्तुत किया व सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्यामल सुमन ने की।
इस मौके पर हरिकिशन चावला, श्यामल सुमन, विजय नारायण सिंह ‘बेरुका’, दीपक वर्मा ‘दीप’, जय प्रकाश पांडेय, धनपत चावला तथा अजय मुस्कान ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं का काव्य-पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम में हास्य, व्यंग्य, संवेदना, दर्शन और सामाजिक सरोकारों के विविध रंग देखने को मिले. कवि अजय मुस्कान की पंक्तियां ‘अब कौन किसे देख मुस्कुराता है,देखे..़ मुझे देख कौन मुस्कुराता है’ ने वर्तमान सामाजिक रिश्तों की संवेदनहीनता को मार्मिक ढंग से अभिव्यक्त किया$ जय प्रकाश पाण्डेय ने अपनी भावपूर्ण मेरी वो मधुर व्यथाएं मन भूल गया है जिनको,
हैं आज कसकती उर में, बेचैन कर रही मुझको की प्रस्तुति दी. श्यामल सुमन ने साहित्य को समाज की आत्मा बताते हुए कहा कि कविता मनुष्य की संवेदनाओं को जीवित रखने का सबसे सशक्त माध्यम है। उनकी प्रस्तुत पंक्तियां हो पूनम का चांद या, जीवन में हो प्यार, पूर्ण हुआ घटने लगा, ऐसा क्यों करतार. कार्यक्रम का सफल संचालन जय प्रकाश पांडेय ने व धन्यवाद ज्ञापन दीपक वर्मा ‘दीप’ ने किया। इस मौके पर विजय नारायण सिंह बेरुका, दीपक वर्मा दीप, अजय मुस्कान आदि मौजूद थे।
