टाटा स्टील के भारतीय धातु संस्थान (आईआईएम) जमशेदपुर चैप्टर, सीएसआईआर राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) व ऑल इंडिया इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन (एआईआईएफए) के सहयोग से गुरुवार से एसएनटीआई में सतत गुणवत्ता व उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हुआ. इस मौके पर सीएसआईआर एनएमएल के निदेशक डा. संदीप घोष चौधरी ने स्क्रैप की गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों, विशेषकर ट्रैम्प एलिमेंट्स की बढ़ती मात्रा पर चिंता व्यक्त की, जो इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस व इंडक्शन फर्नेस तकनीकों के विस्तार के साथ एक बड़ी समस्या बनती जा रही है।
एसएनटीआई में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन सीएसआईआर एनएमएल के निदेशक डा. संदीप घोष चौधरी, ऑल इंडिया सस्टेनेबल स्टील मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश मंधानी, टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च सुबोध पांडेय, चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर डा. अतनु रंजन पाल, मुख्य गुणवत्ता आश्वासन, लॉन्ग प्रोडक्ट्स डा. टी भास्कर ने किया. इस मौके पर डा. टी. भास्कर ने इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस व इंडक्शन फर्नेस आधारित इस्पात निर्माण की बढ़ती उपयोगिता और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला. वहीं डा. अतनु रंजन पाल ने धातुकर्म एवं सामग्री विज्ञान के क्षेत्र में पेशेवरों व छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने में आईआईएम की भूमिका को रेखांकित किया।
योगेश मंधानी ने भारतीय संदर्भ में इंडक्शन फर्नेस के बढ़ते उपयोग और नई तकनीकों की आवश्यकता पर जोर देते हुए प्राथमिक एवं द्वितीयक इस्पात उत्पादकों के बीच समन्वय को जरूरी बताया। उन्होंने सुबोध पांडे ने टाटा स्टील के वैश्विक परिचालन का उल्लेख करते हुए ग्रीन स्टील की दिशा में स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और लागत नियंत्रण को अहम बताया। इस मौके पर स्टील उद्योग के पेशेवरों, शोधकर्ताओं व तकनीकी विशेषज्ञों समेत करीब 200 प्रतिनिधि मौजूद थे।
