भारत में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक चिंताजनक रुझान देखा है, जहाँ सिर और गर्दन के कैंसर अब चालीस वर्ष और उससे कम उम्र के युवाओं को अपनी चपेट में ले रहे हैं। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब तंबाकू, गुटखा, खैनी और सुपारी के अत्यधिक सेवन के कारण युवाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में दुनिया के सबसे अधिक सिर और गर्दन के कैंसर के मामले हैं, और दो हजार चालीस तक सालाना नए कैंसर के मामलों की संख्या बीस लाख से अधिक होने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू और शराब का घातक मिश्रण, खराब जीवनशैली, तनाव और शहरी क्षेत्रों में एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) संक्रमण इस बीमारी के मुख्य कारक हैं। मौखिक कैंसर अकेले भारतीय पुरुषों में होने वाले कुल कैंसर का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मुंह में न भरने वाले छाले, गले में लगातार खराश या गर्दन में गांठ जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती पहचान और बचाव के लिए तंबाकू और सुपारी से दूरी बनाना तथा संतुलित आहार अपनाना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
