टाटा वर्कर्स यूनियन की सोमवार को माइकल जॉन ऑडिटोरियम में हुई कमेटी मीटिंग में ग्रेड रिवीजन को लेकर जमकर हंगामा हुआ। बंचिंग और नॉन-बंचिंग के मुद्दे पर चर्चा के दौरान अध्यक्ष संजीव चौधरी और महामंत्री सतीश सिंह के समर्थक आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई की स्थिति बन गई। घटना के बाद यूनियन के अंदर चल रही आपसी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई।
कमेटी मीटिंग सुबह करीब नौ बजे शुरू हुई। बैठक में दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने, पिछली कमेटी मीटिंग के मिनट्स तथा पिछले चार महीने के अकाउंट्स को पारित करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद टाटा स्टील कर्मचारियों के हालिया ग्रेड रिवीजन में बंचिंग और नॉन-बंचिंग से जुड़े मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई।
बताया जाता है कि बंचिंग के मुद्दे पर यूनियन के दोनों खेमों की राय अलग-अलग है। अध्यक्ष समर्थक बंचिंग के पक्ष में बताए जा रहे हैं, जबकि महामंत्री समर्थक इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर चर्चा के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और हंगामा शुरू हो गया। स्थिति धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गई।
चुनावी राजनीति के लिए कर्मचारियों को भ्रमित करने का आरोप
यूनियन के कुछ कमेटी सदस्य ऐसे भी हैं, जो अध्यक्ष और महामंत्री दोनों खेमों से दूरी बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए यूनियन के पदाधिकारी और उनके समर्थक एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। उनका आरोप है कि ग्रेड रिवीजन में कर्मचारियों को हुए लाभ-हानि के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय आपसी विवाद के जरिए कर्मचारियों को भ्रमित किया जा रहा है।
श्याम बाबू ने उठाए वेज रिवीजन पर सवाल
टाटा वर्कर्स यूनियन के असिस्टेंट सेक्रेटरी श्याम बाबू ने कहा कि कमेटी मीटिंग से यह स्पष्ट हो गया कि वेज रिवीजन में न्यू सीरीज के कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है। उन्होंने कहा कि जब वार्ता करने वाली टीम को ही यह स्पष्ट नहीं है कि समझौते में क्या किया गया, तो इससे कई सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूनियन के कमेटी सदस्यों को जातीय और वर्गीय आधार पर बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को संकीर्ण विचारों से ऊपर उठकर यूनियन को मजबूत करने की जरूरत है। आने वाले चुनाव में नई और युवा टीम को मौका दिया जाना चाहिए।
श्याम बाबू ने कहा कि जब पदाधिकारी अपने कार्यकाल में कर्मचारी हित की बात नहीं कर रहे हैं तो अंतिम कार्यकाल में उनसे क्या उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने कर्मचारियों से ऐसे लोगों को संगठन से बाहर करने की अपील की, जो उनके अनुसार कर्मचारी हितों के बजाय व्यक्तिगत और चुनावी हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आरसी झा ने घटना को बताया शर्मनाक
कमेटी सदस्य आरसी झा ने बैठक में हुई घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि संगठन की बैठक में वाद-विवाद होना स्वस्थ लोकतंत्र का प्रमाण है, लेकिन गाली-गलौज और हाथापाई को किसी भी स्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।
आरसी झा ने कहा कि सोमवार की बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि वेज समझौते के दौरान सभी 11 पदाधिकारियों में सहमति थी, लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे कमेटी मेंबरों और कर्मचारियों में खुद को छला हुआ महसूस करने की भावना पैदा हुई है।
ग्रेड रिवीजन के बाद बंचिंग और नॉन-बंचिंग का मुद्दा कर्मचारियों के बीच लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में कमेटी मीटिंग में हुआ यह विवाद यूनियन नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन गया है। अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि यूनियन नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम और ग्रेड रिवीजन से जुड़े सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।
