पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार रात कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय में आयोजित राम-शरद कोठारी प्रतिभा सम्मान समारोह में राज्य के राजनीतिक माहौल, चुनाव के बाद की स्थिति, संस्कृति और परंपरा की पुनर्स्थापना तथा सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने इस बार भाजपा को वोट देकर उन्हें और पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं को बचा लिया, अन्यथा 2021 के बाद जैसी परिस्थितियां थीं, उससे भी अधिक खराब स्थिति पैदा हो सकती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने जिस तरह चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और सुचारू तरीके से पूरा कराया, उससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की मांग पूरी हुई है। उनके अनुसार, चुनाव के बाद जिस तरह की हिंसा की आशंका व्यक्त की जा रही थी, वैसी स्थिति इस बार देखने को नहीं मिली। उन्होंने कहा कि भाजपा का उद्देश्य बंगाल की राजनीति में हिंसा की संस्कृति को समाप्त करना और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करना है।
शुभेंदु अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक परिस्थितियां नहीं बदलतीं तो उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर तैयारी करनी पड़ती। उन्होंने बताया कि उनके पिता की उम्र करीब 90 वर्ष है और माता की उम्र 80 वर्ष से अधिक है। उस समय उन्होंने स्वयं संघर्ष करने और जरूरत पड़ने पर जेल जाने तक की तैयारी कर ली थी। किसी विपरीत परिस्थिति में अपने बुजुर्ग माता-पिता को ओडिशा भेजने की तैयारी भी उन्होंने कर रखी थी।
उन्होंने कहा कि समय रहते परिस्थितियां बदलीं और पश्चिम बंगाल की जनता ने उन्हें बचा लिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने के बाद कम समय में कई काम शुरू किए गए हैं, लेकिन अभी बहुत काम बाकी है। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल केवल धार्मिक आस्था की भूमि नहीं बल्कि देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भूमि है तथा राज्य की खोई हुई संस्कृति और परंपराओं को फिर से मजबूत करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
कार्यक्रम में राम और शरद कोठारी के बलिदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन में दोनों भाइयों का बलिदान बंगाल के इतिहास से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को बंगाल की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कोठारी बंधुओं की स्मृति में राज्य में सड़क का नाम रखने तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में उनके नाम से पुरस्कार शुरू करने जैसी पहल पर भी विचार करने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने तारापीठ, तारकेश्वर और मदनमोहनजी को जोड़ने वाले करीब 2,000 करोड़ रुपये के तीर्थ सर्किट की प्रस्तावित योजना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ बंगाल की विरासत को संरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।
महिलाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सरकार की प्राथमिकताएं गिनाईं। उन्होंने सीमा सुरक्षा के लिए बीएसएफ को जमीन उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही। महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून बनाने की दिशा में सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने गो-संरक्षण का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने गोशालाओं की संख्या बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस दिशा में पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने बताया कि पुरुलिया, कोलकाता और खड़गपुर में छोटी गोशालाएं संचालित हो रही हैं और अन्य स्थानों पर भी ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक संस्कृति को बदलने में समय लगेगा, लेकिन सरकार इस दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हर काम को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय जनता के हित में प्रशासन और विकास को आगे बढ़ाया जाए। उनका कहना था कि बंगाल की संस्कृति, परंपरा, सुरक्षा और विकास को साथ लेकर आगे बढ़ना सरकार की प्राथमिकता है।
