September 3, 2026
EDUCATION

सीएसआईआर–राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल), जमशेदपुर में बुधवार को एसीएसआईआर-एनएमएल साइंस क्लब के तत्वावधान में शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक करियर को दिशा देने और भावी शोधकर्ताओं के निर्माण में शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों की भूमिका को रेखांकित करना था।
समारोह के मुख्य अतिथि सीएसआईआर-एनएमएल के पूर्व निदेशक डॉ. एस. श्रीकांत थे। कार्यक्रम में उनका स्वागत करते हुए एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने मजबूत शोध संस्कृति के निर्माण में मार्गदर्शन और मेंटरशिप के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, एसीएसआईआर-एनएमएल के समन्वयक डॉ. वी. राजिनीकांत ने उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने में एसीएसआईआर की भूमिका पर विचार रखे।
अपने संबोधन में डॉ. श्रीकांत ने एसीएसआईआर-एनएमएल के शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि कार्यक्रम की स्थापना के दौरान कई चुनौतियां सामने आई थीं। वैज्ञानिकों, शिक्षकों और उद्योग जगत के सहयोगियों के सामूहिक प्रयासों से संस्थान में शोध एवं उच्च शिक्षा के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ। उन्होंने कहा कि एसीएसआईआर-एनएमएल से शिक्षा प्राप्त करने वाले कई शोधार्थी आगे चलकर प्रतिष्ठित शैक्षणिक और वैज्ञानिक पदों पर पहुंचे हैं।
उन्होंने एनएमएल में शैक्षणिक कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करने तथा समय की जरूरत के अनुरूप उनमें सुधार और नवाचार करते रहने की आवश्यकता बताई, ताकि सामग्री अनुसंधान के क्षेत्र में एनएमएल उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों की पसंद बना रहे।
AI के दौर में भी शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण
डॉ. श्रीकांत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि एआई ने शिक्षण और सीखने के पारंपरिक तरीकों में बदलाव शुरू कर दिया है। इसके बावजूद ऐसा प्रेरणादायी शिक्षक, जो विद्यार्थियों में जिज्ञासा, स्पष्टता और नवाचार की भावना पैदा करे, हमेशा महत्वपूर्ण रहेगा।
उन्होंने अपने तीन उत्कृष्ट शिक्षकों प्रो. राजेश प्रसाद, प्रो. पी. रामचंद्र राव और प्रो. टी. आर. अनंतरामन को भी श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि उनके शिक्षण, नवाचार और मार्गदर्शन के तरीकों ने उनके जीवन और वैज्ञानिक यात्रा पर गहरा प्रभाव डाला।
युवा शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए डॉ. श्रीकांत ने कहा, “एक महान शिक्षक वही है, जो महान विद्यार्थियों का निर्माण करता है।”
कार्यक्रम के अंत में एनएमएल निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने डॉ. एस. श्रीकांत को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
पूर्व निदेशकों से रूबरू हुए शोधार्थी
समारोह के बाद एसीएसआईआर शोधार्थियों के लिए संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इसमें सीएसआईआर-एनएमएल के दो पूर्व निदेशक डॉ. एस. श्रीकांत और डॉ. आई. चट्टोराज शामिल हुए। शोधार्थियों ने दोनों पूर्व निदेशकों से सीधे संवाद किया तथा वैज्ञानिक अनुसंधान, नेतृत्व और करियर विकास से जुड़े सवाल पूछे। इस दौरान शोधार्थियों को पूर्व नेतृत्वकर्ताओं के अनुभवों और विचारों से सीखने का अवसर मिला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *