विश्व लिवर दिवस’ के अवसर पर लिवर विशेषज्ञों ने भारत के युवाओं में एनर्जी ड्रिंक्स के अत्यधिक सेवन से होने वाले लिवर डैमेज पर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉक्टरों के अनुसार, इन ड्रिंक्स में मौजूद अत्यधिक चीनी, कैफीन और एडिटिव्स लिवर कोशिकाओं में वसा के जमाव, ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन को बढ़ावा देते हैं, जिससे ‘नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है। एक हालिया रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इनमें मौजूद नियासिन विटामिन की उच्च खुराक लिवर के लिए विषाक्त साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी आबादी का लगभग २५-३०% हिस्सा पहले से ही फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहा है, और एनर्जी ड्रिंक्स इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि २० और ३० की उम्र के युवा अब लिवर फेलियर जैसी गंभीर समस्याओं के साथ अस्पतालों में पहुँच रहे हैं। विशेष रूप से एनर्जी ड्रिंक्स को शराब के साथ मिलाकर पीना और भी खतरनाक है, क्योंकि कैफीन शराब के नशीले प्रभाव को छिपा देता है, जिससे व्यक्ति अधिक मात्रा में सेवन कर लेता है और लिवर पर दबाव बढ़ जाता है। यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया और इन मीठे व कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के सेवन में कटौती नहीं की गई, तो लिवर सिरोसिस और लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बच सकता है। डॉक्टरों ने युवाओं को जागरूक रहने और स्वस्थ आदतों को अपनाने की सलाह दी है।
