भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के लिए नए और लचीले दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो १ जुलाई, २०२६ से प्रभावी होंगे। इन नियमों के तहत अब बैंक कर्जदारों के अनुरोध का इंतजार किए बिना ही उन्हें राहत प्रदान कर सकेंगे। यह राहत उन खातों के लिए उपलब्ध होगी जो ‘स्टैंडर्ड’ श्रेणी में हैं और आपदा के समय ३० दिनों से अधिक के बकाये में नहीं थे। यदि आपदा के बाद कोई खाता एनपीए हो जाता है, तो समाधान योजना लागू होने पर उसे फिर से ‘स्टैंडर्ड’ श्रेणी में अपडेट किया जा सकेगा। इसके साथ ही ग्राहकों के पास आपदा घोषित होने के १३५ दिनों के भीतर इस राहत योजना से बाहर निकलने का विकल्प भी होगा।
बैंकिंग सेवाओं को सुचारू बनाने के लिए बैंक अब आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी परिसरों, सैटेलाइट ऑफिस या मोबाइल बैंकिंग के जरिए अपनी शाखाएँ संचालित कर सकेंगे। आरबीआई ने बैंकों को एटीएम सेवाओं को जल्द बहाल करने और नकदी की जरूरतों के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। बैंक अपने विवेक से १ वर्ष तक शुल्क और अन्य मदों में कटौती कर सकते हैं, लेकिन ऐसे खातों पर बकाया कर्ज का अतिरिक्त ५ प्रतिशत प्रावधान करना अनिवार्य होगा। यह नई रूपरेखा वाणिज्यिक बैंकों, सहकारी बैंकों और एनबीएफसी सहित सभी वित्तीय संस्थानों पर लागू होगी, जिसका मुख्य उद्देश्य संकट के समय उधारकर्ताओं के वित्तीय तनाव को कम करना है।
