वैश्विक बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उस समय आई जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद के लिए कदम उठाएगा। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं होने के कारण तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 66 सेंट यानी 0.61 प्रतिशत गिरकर 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में अधिक गिरावट देखी गई और यह 2.83 डॉलर यानी 2.77 प्रतिशत टूटकर 99.11 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। घरेलू बाजार में भी इसका असर देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल का फ्यूचर पिछले बंद भाव से 44 रुपये यानी 0.45 प्रतिशत गिरकर 9,621 रुपये पर कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों का सीधा असर भारतीय कमोडिटी बाजार पर पड़ा है। तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों के कारण देखी गई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका प्रतिबंधित जलमार्गों में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने में मदद करेगा, ताकि वे बिना किसी रुकावट के अपना संचालन जारी रख सकें। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई देशों ने, जिनमें कुछ तटस्थ देश भी शामिल हैं, अमेरिका से होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों की सहायता करने की अपील की है। इस क्षेत्र में तनाव लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय रहा है, क्योंकि यहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है।
