सोना रिफाइनिंग एवं आभूषण विनिर्माण क्षेत्र की दिग्गज कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के हालिया कड़े रुख पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। नई दिल्ली से जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने रविवार को दावा किया है कि वह बाजार नियामक (सेबी) को पहले ही तीन सौ से चार सौ गीगाबाइट (जीबी) के महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंप चुकी है, लेकिन उसका मानना है कि नियामक विभाग अपनी तकनीकी जांच के दौरान उन सही फाइलों को ढूंढ नहीं पाया है। इस प्रशासनिक और तकनीकी असमंजस को पूरी तरह स्पष्ट करने और मामले को सुलझाने के लिए कंपनी ने घोषणा की है कि वह मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज आगामी पंद्रह दिनों के भीतर सेबी के समक्ष फिर से जमा करेगी।
कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन राजेश मेहता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में सेबी द्वारा तीन जून को जारी किए गए अंतरिम आदेश को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस अंतरिम आदेश में कंपनी पर वित्त वर्ष दो हजार बीस-इक्कीस से दो हजार चौबीस-पच्चीस के दौरान पंद्रह दशमलव एक पांच लाख करोड़ रुपये की कथित राजस्व वृद्धि (रेवेन्यू इनफ्लेशन) का जो गंभीर आरोप लगाया गया है, वह असल में एक बुनियादी लेखांकन त्रुटि (अकाउंटिंग एरर) पर आधारित है। चेयरमैन ने भरोसा जताया कि पंद्रह दिनों के भीतर सभी प्रासंगिक वित्तीय आंकड़ों को दोबारा प्रस्तुत करने से नियामक की सभी गलतफहमियां दूर हो जाएंगी और कंपनी की पारदर्शी छवि एक बार फिर साबित होगी।
