May 21, 2026
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वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत को एलपीजी की आपूर्ति में रोजाना लगभग ४,००,००० बैरल के बड़े अंतर (शॉर्टफाल) का सामना करना पड़ रहा है। भारत अपनी घरेलू रसोई गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट और ईरान संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर बढ़ते सुरक्षा खतरों ने इस सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। हाल ही में भारत आ रहे दो एलपीजी टैंकरों को इस समुद्री मार्ग में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि एक भारतीय ध्वज वाला मालवाहक जहाज हमलों का शिकार होकर समुद्र में डूब गया। इसके साथ ही, अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन की जांच को सुलझाने के लिए अदानी समूह की एक इकाई द्वारा ईरानी एलपीजी आयात के मामले में २७.५ करोड़ डॉलर का समझौता भुगतान करने की खबर भी सुर्खियों में बनी हुई है।

इस गंभीर कमी को दूर करने और देश में ईंधन की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने राजनयिक और रणनीतिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। इसके तहत भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने कच्चे तेल, एलएनजी, एलपीजी और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण सौदों को शामिल करते हुए अपने द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को और अधिक मजबूत किया है, ताकि वैकल्पिक सुरक्षित मार्गों से गैस की खेप मँगाई जा सके। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और लॉजिस्टिक्स की इन नई चुनौतियों ने देश के भीतर एलपीजी की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भारी दबाव बना दिया है। सरकार की कोशिश है कि इस बड़े शॉर्टफाल का सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं और औद्योगिक क्षेत्रों पर न पड़े, जिसके लिए नए आयात विकल्पों और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल पर तेजी से काम किया जा रहा है।

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