July 9, 2026
bihar (1)

जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी शिव शंकर सिंह ने कहा कि केबुल कंपनी को जो भी कंपनी खोलें चाहे वेदांता हो या अन्य कंपनी हो. यदि कर्मचारियों के हितों में फैसला लेकर कंपनी खोली जाती है तो केबुल कालोनी समेत जमशेदपुर के लोग स्वागत करेंगे यदि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जाती है तो बड़ा जन आंदोलन भी किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ऐसे में कंपनी प्रबंधन को चाहिए कि वह अपनी बातों को कर्मचारियों के बीच रखें, कर्मचारियों की बातों को भी सुने और आपसी सामंजस्य बनाकर कंपनी को खुलने में आगे बढ़ाएं। बुधवार की शाम गोलमुरी स्थित एक होटल में आयोजित प्रेसवार्ता मेंं जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी व समाजसेवी शिव शंकर सिंह ने कहा कि मंगलवार शाम कई कर्मचारियों के खाते में एक-एक रुपए का ट्रांजैक्शन हुआ है जिससे कर्मचारियों में भय, दहशत, चिंता व आक्रोश का माहौल है. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वकील से सलाह ली जा रही है कि कोई दूसरा किसी अन्य बैंक अकाउंट में बिना कोई जानकारी दिए छेड़छाड़ कर सकता है।

यदि नहीं तो इस मामले को लेकर कर्मचारी आगे की रणनीति बनाएं. उन्होंने कहा कि  उन्होंने कहा कि जैसा कि जानकारी मिली है कि केबुल कंपनी का वेदांता ने अधिग्रहण किया है इसके बाद से कर्मचारियों के बीच असमंजस और भय का माहौल बना हुआ है, जिसे दूर करने के लिए नए प्रबंधन को कर्मचारियों से सीधे संवाद करना चाहिए. मंगलवार की शाम कर्मचारियों के बैंक खातों में बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित जानकारी के एक-एक रुपये भेजे गए, जिससे कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है. कर्मचारियों को आशंका है कि भविष्य में उनकी सहमति के बिना खाते में कोई अन्य राशि भेजी जा सकती है. उन्होंने कहा कि यदि वेदांता ने केबुल कंपनी का अधिग्रहण किया है तो कर्मचारियों को विश्वास में लेकर जल्द उत्पादन शुरू करना चाहिए जिससे न केवल कर्मचारियों बल्कि पूरे शहर में सकारात्मक संदेश जाएगा और लोग इसका स्वागत करेंगे. उन्होंने कहा कहा कि इसके लिए यह जरूरी है कि कर्मचारियों के बीच बकाया वेतन, भविष्य निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी व अन्य लंबित देयों को लेकर कई सवाल हैं, लेकिन उन्हें किसी स्तर पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है. इसके अलावा कार्यरत कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें दोबारा काम पर बुलाया जाए अथवा उनके पुत्र-पुत्रियों को रोजगार दिया जाए. इस संबंध में भी कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आयी है। उन्होंने कहा कि कंपनी सीक होने के बाद कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए।

इस दौरान उन्होंने और उनके परिवारों ने आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई तथा कई परिवारों को पलायन करना पड़ा. ऐसे कर्मचारियों की मांग है कि कंपनी बंद होने के समय से लंबित सभी बकाया का भुगतान शत-प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए. यदि कर्मचारियों मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे अपने परिवारों के साथ आंदोलन करने को विवश होंगे. उन्होंने कहा कि जब तक सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक कंपनी क्षेत्र के आवास, क्लब, मैदान व अन्य सामाजिक संरचनाओं को नहीं छेड़ा जाए. उन्होंने कहा कि केबुल कंपनी का मामला अब केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जमशेदपुर की नजर इस पर है. शहर के लोगों ने वर्षों से केबुलवासियों का संघर्ष देखा है और वे उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने नए प्रबंधन से अपील की कि कर्मचारियों के साथ शीघ्र बैठक कर आपसी सहमति से सभी लंबित मुद्दों का समाधान निकाला जाए, ताकि कंपनी में उत्पादन शुरू होने के साथ कर्मचारियों का भविष्य भी सुरक्षित हो सके. इस मौके पर केबुल बचाओ संघर्ष समिति के संरक्षक डा. बी बी महतो मौजूद थे।

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