September 18, 2026
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पड़ोसी देश नेपाल सहित उत्तर बिहार के अधिकतर जिलों में हुई अतिवृष्टि से राज्य एक बार फिर से बाढ़ की चपेट में है।बिहार में बागमती, कोसी, कमला, बलान समेत कई अन्य नदियां उफान पर हैं, जिससे मोतिहारी, सुपौल, अररिया, मधेपुरा और सहरसा समेत कई जिलों में स्थिति विकट है।

अक्टूबर महीने में एक बार आसमान से आफत बरस रही है। लगातार हो रही बारिश से लोगों की जिंदगी मुश्किलों में घिर गई है। सबसे बुरा हाल बिहार का है,जहां बारिश से कई जिलों में हालात खराब हैं। बिहार में कोसी और कमला जैसी नदियां उफान पर हैं। गांव के गांव पानी में डूबे हुए हैं और लोग भारी मुसीबत झेल रहे हैं। नेपाल से सटे पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), सुपौल, अररिया, सीतामढ़ी, मधुबनी, मधेपुरा, सहरसा, किशनगंज, कटिहार समेत कई जिलों में बाढ़ के पानी ने लोगों के बीच दहशत है। सैंकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है, जिससे धान की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

जल संशाधन विभाग से प्राप्त आकड़ों के मुताबिक बागमती, कोसी, कमला, बलान और गंडक समेत अधवारा समूह की नदियां उफान पर हैं। बाढ़ प्रभावित परिवार ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। सुपौल जिले के वीरपुर स्थित कोसी बराज के सभी 56 फाटकों को रविवार को खोल दिया गया था। कोसी बैराज से रविवार को 5.33 लाख क्यूसेक से ज़्यादा पानी छोड़ा गया, जो इस साल का सबसे ज़्यादा पानी है। वहीं आज सोमवार को 3,77,670 क्यूसेक पानी बराज से छोड़ा गया है। आज कोसी बराज पर पानी का डिस्चार्ज काफी तेजी से घट रहा है, लेकिन बराज से डिस्चार्ज हुआ पानी अब तटबंध के अंदर तबाही मचाने लगी है।

सुपौल सदर प्रखंड, किशनपुर, मरौना और सरायगढ़ प्रखंड के करीब ढाई दर्जन से अधिक गांव में बाढ़ का पानी तेजी से फैल रहा है। इससे करीब एक लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और उनमें बाढ़ से निपटने के लिए हायतौबा मची हुई है। तटबंध के अंदर से लोग पालयन कर पूर्वी कोसी तटबंध पर शरण लिए हुए हैं। प्लास्टिक के नीचे तंबू बनाकर रहने को मजबूर हैं। माइकिंग के माध्यम से बाढ़ प्रभावित लोगों को सतर्क रहने के साथ हीं ऊंचे स्थल पर पहुंचने की अपील की जा रही है।

अररिया जिले में भी पानी के दवाब के बीच फारबिसगंज के पिपरा पंचायत स्थित परमान नदी का बांध टूटने से तीन वार्ड के सैकड़ों घर पानी में समा गये हैं। पीड़ितों के बीच त्राहिमाम की स्थिति है। लोग सड़क पर उतर आए हैं और प्रशासन से राहत व सहायता की गुहार लगा रहे हैं । ग्रामीणों के अनुसार बांध अभी 10 से 15 मीटर टूटी है। देखरेख के अभाव में बांध के टूटने का आरोप ग्रामीण लगा रहे हैं। ग्रामीण बच्चों और सामान के साथ-साथ मवेशियों को भी ऊंचे स्थान पर ले जाना शुरू कर दिए हैं। फारबिसगंज के अंचल अधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया जा रहा है। प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है।

पूर्वी चंपारण में नेपाल की जान नदी के बाढ़ का पानी ढाका प्रखंड के कई गांवों में घुस जाने से स्थिति गंभीर होने लगी है। सड़कों पर पानी बह रहा है। बाढ़ का पानी ढाका प्रखंड के हीरापुर, महगुआ, गुरहनवा, भवानीपुर, दोस्तियां, तेलहारा कला सहित कई गांवों में फैल गया है। गुरहनवा से हीरापुर, गुरहनवा से भवानीपुर, कुसमहवा से दोस्तियां जानेवाली सड़कों के ऊपर पानी बहने से आवागमन बाधित है। पानी से सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसलें डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। आज ढाका प्रखंड क्षेत्र के अन्य कई नए इलाकों में पानी प्रवेश करने की आशंका है। देर रात तक प्रशासनिक अधिकारी स्थिति का जायजा लेते रहे। लालबकेया नदी के जलस्तर में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

सुगौली प्रखंड के कई क्षेत्रों में सिकरहना नदी का पानी तेजी से फैलने लगा है। सुगौली थाना क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बेलवतिया रघुनाथपुर मुख्य सड़क में धूनीअवाचाती व महवानी के पास निर्माणाधीन पुल के डायवर्सन पर करीब तीन फीट पानी का बहाव प्रारंभ हो गया है। साथ ही नगर पंचायत के सुगौली-विशुनपुरवा-पीपरपाती सड़क में कुरुमटोला के पास सुगौली बाजार अमीर खां टोला, नौवाडीह सड़क, बेलइठ सड़क पर भी करीब दो फीट पानी का बहाव हो रहा है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। सुगौली नगर पंचायत के वार्ड संख्या एक, दो, तीन, ग्यारह, बारह, सात, चौदह, पन्द्रह और अठारह में भी बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है।

मधुबनी जिले के झंझारपुर से होकर गुजरने वाली कमला बलान नदी का जलस्तर इस साल के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस नदी का जलस्तर खतरे के निशान (लाल निशान 50.50 मीटर) से 190 सेंटीमीटर ऊपर चला गया है और अभी भी इसमें लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। वर्तमान में जलस्तर 52.40 मीटर है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण झंझारपुर को राष्ट्रीय राजमार्ग-57 से जोड़ने वाली लिंक रोड पर बने सड़क पुल पर पानी का भारी दबाव है। पुल का गर्डर पानी में डूब गया है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार, यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही, तो बाढ़ का पानी कभी भी पुल के ऊपर से बहना शुरू हो सकता है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो जाएगा।

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