April 19, 2026
Loksabha-Seat

केंद्र सरकार ने लोकसभा के बड़े विस्तार का प्रस्ताव रखा है। 2029 के आम चुनावों से पहले एक बड़े परिसीमन अभ्यास के तहत, लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। बताया जा रहा है कि चर्चा के लिए सांसदों के साथ एक मसौदा विधेयक साझा किया गया है, जिसमें राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें तय की गई हैं।

सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के कार्यान्वयन से जुड़ा है, जिसके तहत लोकसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान है। कहा जा रहा है कि सरकार इस आरक्षण को नई जनगणना से अलग करने की योजना बना रही है। इसके बजाय, 2029 तक कार्यान्वयन की समय-सीमा को पूरा करने के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर रहने की तैयारी है।

सूत्रों के अनुसार, इस पुनर्गठन में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण वृद्धि शामिल है। SC सीटों की संख्या 84 से बढ़कर 136 तक होने की उम्मीद है, जबकि ST सीटों की संख्या 47 से बढ़कर लगभग 70 हो सकती है। इसका उद्देश्य संसदीय प्रतिनिधित्व में अद्यतन जनसांख्यिकीय तथ्यों को दर्शाना है।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने के लिए ‘परिसीमन विधेयक 2026’ पेश करने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया में एक आनुपातिक दृष्टिकोण अपनाए जाने की उम्मीद है, ताकि सभी राज्यों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिल सके। विशेष रूप से, जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित परिवर्तनों के लिए संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता होगी। इसमें सीटों के आवंटन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव शामिल हैं, और इन संशोधनों को संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना अनिवार्य होगा। इस कानून पर विचार-विमर्श करने के लिए संसद का एक विशेष और विस्तारित सत्र आयोजित करने की योजना है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इससे भारत की संसदीय संरचना और प्रतिनिधित्व में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे।

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