September 14, 2026
image (4)

पहले सेलफोन नंबर बंद होने का डर। फिर दिल्ली पुलिस के अधिकारी रौब। उसके बाद बिहार पुलिस और अंत में सीबीआई का नाम लेकर मनी लान्ड्रिंग के केस में फंसाकर गिरफ्तारी की धमकी दी।
अंत में खाते में करोड़ों रुपयों के अवैध लेनदेन का भय दिखाकर पूर्वी चंपारण जिले के हरसिद्धि थानाक्षेत्र के मेहता लाला टोला निवासी रामाशंकर प्रसाद गुप्ता के साथ साइबर ठगों ने 18.50 लाख की ठगी कर ली। ठगी का खेल यहीं खत्म नहीं हुआ। पीड़ित को लगातार संपर्क में रखकर रोजाना करीब छह घंटे तक आनलाइन मीटिंग कर लान्ड्रिंग के बिंदु पर पूछताछ की जाती रही। पीड़ित के आग्रह पर 24 घंटे में पैसा वापस करने का भरोसा दिया गया, लेकिन रकम वापस नहीं हुई। इसके बाद पीड़ित को साइबर फ्राड का एहसास हुआ तो उन्होंने शनिवार को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाना में दिए आवेदन में रामाशंकर प्रसाद गुप्ता ने बताया है कि 26 अगस्त 2026 की सुबह करीब 8:07 बजे उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आया। फोन करनेवाले ने खुद को टेलीफोन विभाग से जुड़ा बताते हुए कहा कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर साइबर फ्राड में इस्तेमाल हो रहा है।
इसके बाद कथित ठग ने उन्हें दूसरे नंबर से संपर्क करने को कहा। मामला दिल्ली पुलिस तक पहुंचा दिया। रामाशंकर के नाम पर 6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बताकर डराया।
फोन पर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने पीड़ित को बताया कि उनके नाम पर एक बैंक खाता है, जिसमें करीब 6 करोड़ 80 लाख रुपये की मनी लान्ड्रिंग हुई है। उन्हें कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाया गया। इसके बाद कथित तौर पर पुलिस और सीबीआई अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करते हुए वीडियो काल पर पूछताछ की गई।
पीड़ित का कहना है कि कथित अधिकारियों ने उनके बैंक खातों की जानकारी ली। जांच के नाम पर खाते में मौजूद रकम को शेयर मार्केट में लगाने का दबाव बनाया। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि शेयर मार्केट की जांच पूरी होने के बाद रकम वापस कर दी जाएगी। खाते में 18.82 लाख रुपये थे। उनमें से 18.50 लाख ट्रांसफर करा लिया। ठगों के निर्देश पर 18.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिए गए।
आवेदन में जिस खाते का विवरण दिया गया है वह आंध्र प्रदेश स्थित गुंटूर सिटी यूनियन बैंक की शाखा का है। रकम ट्रांसफर कराने के बाद ठगों ने कहा कि 24 घंटे के भीतर पैसा वापस कर दिया जाएगा, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी खाते में रकम वापस नहीं आया। इस बीच रोज छह घंटे की आनलाइन मीटिंग करते रहे। रकम ट्रांसफर कराने के बाद भी शातिर ठग पीड़ित के संपर्क में बने रहे। बताया गया है कि रामाशंकर को प्रतिदिन करीब छह घंटे आनलाइन मीटिंग कर तरह-तरह के सुझाव दिए जाते थे।
शेयर मार्केट के नाम पर भी उन्हें लगातार निर्देश दिए जा रहे थे। इसी दौरान पीड़ित को शक हुआ कि वह किसी बड़े साइबर फ्राड का शिकार हो चुका है। साइबर इंस्पेक्टर मनीष कुमार सिन्हा ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की छानबीन की जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *