जमुई जिले के सोनो चौक पर बुधवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। सोनो स्थित संत जेवियर स्कूल के बच्चों को लेकर जा रही एक पुरानी मैजिक वैन की बैटरी अचानक तेज आवाज के साथ फट गई। इस भीषण ब्लास्ट के बाद बैटरी के भीतर मौजूद रासायनिक तेजाब (एसिड) वैन में बैठे मासूम बच्चों के पैरों पर छिटक गया, जिससे तीन छात्र गंभीर रूप से झुलस गए। विस्फोट होते ही गाड़ी के भीतर मासूमों की चीख-पुकार मच गई और चौक पर अफरातफरी का माहौल बन गया। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और दुकानदारों ने तुरंत तत्परता दिखाई और घायल बच्चों को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सोनो पहुंचाया। वहां डॉक्टरों द्वारा प्राथमिक उपचार देने के बाद बच्चों को बेहतर चिकित्सा के लिए एक निजी नर्सिंग होम में शिफ्ट कराया गया। एसिड से झुलसने वाले बच्चों की पहचान चुरहेत गांव निवासी कौशल किशोर सिंह के पुत्र गर्व सिंह, कुहिला चरघरा निवासी प्रमोद दास के पुत्र अंकित कुमार तथा दुबेडीह निवासी अमरजीत कुमार के रूप में हुई है। इनमें गर्व सिंह और अंकित कुमार संत जेवियर स्कूल में कक्षा एक के छात्र हैं, जबकि अमरजीत कुमार कक्षा तीन में पढ़ता है। चिकित्सकों के अनुसार, अंकित कुमार और अमरजीत कुमार के पैरों पर तेजाब का असर ज्यादा हुआ है, जिससे वे अपेक्षाकृत अधिक झुलसे हैं और उनका इलाज जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक पुरानी मैजिक वैन से प्रखंड के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र के गांवों से करीब दो दर्जन (24) बच्चों को बैठाकर सोनो लाया जा रहा था। बुधवार की सुबह जैसे ही वाहन सोनो चौक के पास पहुंचा, सीट के नीचे रखी बैटरी में जोरदार धमाका हो गया। घटना की खबर लगते ही स्कूल परिसर में भी हड़कंप मच गया। विद्यालय के निदेशक सुनील कुमार और शिक्षक तुरंत अस्पताल पहुंचे। निदेशक ने बताया कि तकनीकी खराबी से बैटरी फटने के कारण यह हादसा हुआ और घायल बच्चों के समुचित इलाज की व्यवस्था की जा रही है। घटना की सूचना पर सोनो पुलिस अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची। थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिजनों को सूचित कर दिया गया है। इस हादसे ने एक बार फिर जिले में स्कूली बच्चों को ढोने वाले वाहनों की सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभिभावकों का आरोप है कि निजी विद्यालय बच्चों से परिवहन का भारी-भरकम शुल्क वसूलते हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया जाता है। क्षमता से अधिक बच्चों को जर्जर व अनफिट गाड़ियों में भेड़-बकरियों की तरह बैठाया जाता है। पुराने वाहनों की न तो नियमित तकनीकी जांच होती है और न ही सीटिंग का सही प्रबंध रहता है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से मांग की है कि स्कूली वाहनों की सघन फिटनेस जांच कर बिना मानक दौड़ रहीं गाड़ियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
