April 12, 2026
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टाटा स्टील के सीईओ व ग्लोबल प्रबंध निदेशक टी वी नरेन्द्रन ने कहा कि भरोसा, सहयोग व तकनीक किसी भी उद्योग की सफलता के लिए जरूरी है. उन्होंने टाटा स्टील की खास संस्कृति के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि कंपनी सिफ्र यूनियनों के साथ ही नहीं, बल्कि ग्राहकों, सप्लायर्स व डिस्ट्रीब्यूटर्स के साथ भी लंबे समय से मजबूत संबंध बनाकर रखती है. उन्होंने अपने 38 वर्ष के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आज वह अपने व्यापारिक साझेदारों की तीसरी पीढ़ी के साथ काम कर रहे हैं, जो इस संबंध की मजबूती को दिखाता है. उन्होंने कहा कि यही निरंतरता और भरोसा टाटा स्टील को अलग बनाता है।  जमशेदपुर कंटीन्युअस एनालिंग प्रोसेस कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (जेसीएपीसीपीएल) वर्कर्स यूनियन के दस वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में  माइकल जॉन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि टाटा स्टील के सीईओ व ग्लोबल प्रबंध निदेशक टी वी नरेन्द्रन, जेएसीएपीसीएल के डायरेक्टर ए तानिगुची, कंपनी के एमडी अभिजीत नानौती, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी, जेसीएपीसीपीएल यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष एस आलम समेत अन्य ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस मौके पर टाटा स्टील एमडी टी वी नरेन्द्रन ने भरोसे के महत्व पर जोर देते हुए कि किसी भी साझेदारी की नींव भरोसे पर टिकी होती है, चाहे वह व्यक्तिगत जीवन हो या पेशेवर. टाटा स्टील में प्रबंधन और यूनियन के बीच दशकों से आपसी सम्मान और समझ का रिश्ता बना हुआ है, जिसने कंपनी को मजबूत बनाए रखा है. उन्होंने कहा कि भरोसा कभी भी एकतरफा नहीं बनता, इसके लिए दोनों पक्षों को समान रूप से प्रयास करना होता है. उन्होंने कहा कि आज  स्टील उद्योग की चुनौतियां जटिल हैं और इन्हें केवल प्रबंधन या यूनियन अकेले हल नहीं कर सकते1 हम हर मुद्दे पर सहमत नहीं हो सकते, लेकिन अगर हम एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करें, तो लंबे समय के लिए बेहतर समाधान निकाल सकते हैं। रउन्होंने निर्णय लेने में दीर्घकालिक सोच की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि टाटा स्टील में हमेशा भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाते हैं, न कि सिर्फ अपने कार्यकाल को देखते हुए. उन्होंने कहा कि टाटा स्टील एक बहु-पीढ़ी वाली कंपनी है और हमारी जिम्मेदारी है कि हम ऐसे फैसले लें जो आने वाले समय में भी कंपनी को मजबूत बनाए रखें. उन्होंने कहा कि निप्पॉन स्टील के साथ टाटा स्टील का पुराना संबंध है. यह रिश्ता पहले तकनीकी सहयोग से शुरू हुआ और बाद में एक मजबूत साझेदारी में बदल गया. उन्होंने कहा कि इस साझेदारी में दोनों कंपनियों के बीच इतना भरोसा था कि वे स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ते हुए भी अच्छे संबंध बनाए रख सके।

उन्होंने कहा कि तकनीक के विषय पर नरेंद्रन ने साफ कहा कि उद्योगों को तकनीकी बदलावों को अपनाना चाहिए, न कि उनका विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक से कुछ नौकरियां खत्म होती हैं, लेकिन नई नौकरियां भी पैदा होती हैं. उन्होंने कहा कि आज जरूरी है कि हम खुद को बदलें और नई स्किल सीखें. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने 1988 में टाटा स्टील ज्वाइन किया तो उस पर हाथ से टाइप राइटर से पत्र लिखा जाता था इसके लिए कई लोग होते तो जब कम्प्यूटर आया तो लोग अपना काम खुद करने लगे. इसके साथ ही नई तकनीकी नौकरियां भी पैदा हुई. उन्होंने कहा कि पहले बैंकिंग सेक्टर में कंप्यूटर के खिलाफ विरोध हुआ था, लेकिन आज उसी तकनीक ने काम को आसान बना दिया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने बताया कि स्टील की कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि लागत बढ़ गई है। ऐसे में कंपनियों के लिए जरूरी है कि वे अपनी कार्यक्षमता बढ़ाएं ताकि प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें. इस मौके पर टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट कॉरपोरेट सर्विसेज डी बी सुन्दर रामम, वीपी पीयुष गुप्ता, वीपी चैतन्य भानू, वीपी प्रभात कुमार, चीफ पीपुल ऑफिसर अत्रेयी सन्याल, जुबिन पालिया, टाटा स्टील यूआईएसएल के प्रबंध निदेशक अतुल कुमार भटनागर, दीपांकर दास गुप्ता, रुचि नरेन्द्रन, टाटा वर्कर्स यूनियन के डिप्टी प्रेसीडेंट शैलेश सिंह, वाइस प्रेसीडेंट संजय सिंह, संजीव तिवारी, राजीव चौधरी, असिस्टेंट सेक्रेट्री नितेश राज, श्याब बाबू, ट्रेजरर अमोद दुबे, रघुनाथ पांडेय, आर बी बी सिंह, विजय खां, राकेश्वर पांडेय समेत अन्य मौजूद थे।

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