दीपावली और लोकआस्था के महापर्व छठ से पूर्व जिले के नियोजित व नियमित शिक्षकों को ससमय वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग पूरी तत्परता से जुट गया है। विभाग की स्थापना शाखा द्वारा अब तक 17,079 शिक्षकों के सेवा रिकॉर्ड और डेटा का ई-शिक्षाकोष पोर्टल से सफलतापूर्वक मिलान कर लिया गया है। हालांकि, ट्रेजरी और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल से अंतिम सत्यापन का काम अभी बाकी है। गौरतलब है कि हाल ही में शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा में उजागर हुए ₹98.12 लाख के बहुचर्चित वेतन गबन कांड के बाद वरीय अधिकारियों ने जिले के सभी शिक्षकों की प्रोफाइल, नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की गहन तकनीकी जांच का आदेश दिया था। इसके बाद से ही स्थापना शाखा में दिन-रात फाइलों की स्क्रूटनी चल रही है।
मंगलवार को क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (आरडीडीई) सुभाष कुमार गुप्ता और प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) महेश प्रसाद ने संयुक्त रूप से स्थापना शाखा का औचक निरीक्षण किया और चल रही जांच प्रक्रिया की बिंदुवार समीक्षा की। अधिकारियों ने अब तक सत्यापित किए गए शिक्षकों की कुल संख्या, विभिन्न प्रखंडों से प्राप्त मूल दस्तावेजों और लंबित फाइलों की वर्तमान स्थिति का ब्योरा लिया। आरडीडीई सुभाष कुमार गुप्ता ने बताया कि सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) के माध्यम से शिक्षकों का संकलित डेटा जिला मुख्यालय को प्राप्त हो चुका है। जिला स्तर पर दस्तावेजों का क्रॉस-वेरिफिकेशन तेजी से कराया जा रहा है। विभाग की पूरी कोशिश है कि त्योहारों से पहले हर हाल में पात्र और निर्दोष शिक्षकों का वेतन निर्गत कर दिया जाए। दूसरी ओर, 98.12 लाख रुपये के सरकारी राशि गबन मामले में मुख्य आरोपित और घटना के बाद से फरार चल रहे स्थापना शाखा के उच्च वर्गीय लिपिक (यूडीसी) शिशिर झा के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। शिशिर झा के कार्यालय स्थित बंद कमरे की आधिकारिक वीडियोग्राफी के साथ इन्वेंटरी कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस बाबत आरडीडीई को प्रस्ताव भेजा था, जहां से अग्रिम कार्रवाई के लिए सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को मजिस्ट्रेट प्रतिनियुक्ति हेतु पत्र भेज दिया गया है। प्रशासनिक अनुमति मिलते ही दंडाधिकारी और पुलिस बल की मौजूदगी में कमरे का ताला तोड़ा जाएगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस बंद कमरे में नियोजित शिक्षकों की सेवा पुस्तिका, मूल अभिलेख और फर्जीवाड़े से जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज बंद हैं, जिनकी बरामदगी से जांच को नई दिशा मिलेगी।
