August 29, 2026
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इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR दाखिल करते समय जल्दबाजी में गलत फॉर्म चुनना कई टैक्सपेयर्स के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। खासकर 31 जुलाई की डेडलाइन के दौरान कई लोग ITR-1 या ITR-2 दाखिल कर देते हैं और बाद में पता चलता है कि उनकी इंट्राडे ट्रेडिंग, F&O में नुकसान या फ्रीलांसिंग से कमाई भी हुई है। ऐसी स्थिति में ITR-3 या ITR-4 की जरूरत पड़ सकती है।

अब नॉन-ऑडिट बिजनेस और प्रोफेशनल टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त की डेडलाइन करीब है। ऐसे में अगर ITR में गलत फॉर्म चुन लिया गया है, तो उसे कब और कैसे सुधारा जाए, यह जानना जरूरी है। इसका तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि दाखिल किया गया ITR अभी वेरिफाई हुआ है या नहीं।

अगर ITR दाखिल करने के बाद अभी तक उसका वेरिफिकेशन नहीं किया गया है, तो टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर ‘Discard’ विकल्प का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे अनवेरिफाइड रिटर्न हटाया जा सकता है।

इसके बाद टैक्सपेयर्स अपनी आय और स्थिति के अनुसार सही ITR फॉर्म चुनकर नया रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। यदि 31 अगस्त की डेडलाइन लागू होती है, तो सही फॉर्म के साथ रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया समय सीमा के भीतर पूरी करना जरूरी हो सकता है।

हालांकि, एक बार ITR ई-वेरिफाई हो जाने के बाद उसी असेसमेंट ईयर के लिए दोबारा नया ओरिजिनल रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता। ऐसे मामले में नया ओरिजिनल रिटर्न दाखिल करने की कोशिश करने पर सिस्टम एरर आ सकता है।

वेरिफाइड रिटर्न में गलती होने पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। इसके जरिए पहले दाखिल किए गए ITR में हुई गलती को ठीक किया जा सकता है।

F&O या इंट्राडे ट्रेडिंग में नुकसान वाले टैक्सपेयर्स के लिए समय पर सही ITR दाखिल करना खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर कोई योग्य बिजनेस या स्पेकुलेटिव लॉस को भविष्य की कमाई के साथ सेट-ऑफ करने के लिए आगे कैरी फॉरवर्ड करना चाहता है, तो तय समय सीमा के भीतर सही रिटर्न दाखिल करना जरूरी हो सकता है।

बिजनेस इनकम वाले टैक्सपेयर्स जो ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प चुनना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर Form 10-IEA जमा करना पड़ सकता है।

ITR में गलती का समय रहते सुधार करने से बाद में अतिरिक्त चार्ज, लेट फीस और अन्य टैक्स संबंधी जटिलताओं से बचने में मदद मिल सकती है। धारा 139(5) के तहत आमतौर पर संबंधित असेसमेंट ईयर की 31 मार्च तक और असेसमेंट पूरा होने से पहले रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है।

हालांकि, रिटर्न में सुधार करने में ज्यादा देरी करने से रिफंड मिलने में देरी हो सकती है। इसके अलावा, धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस मिलने का जोखिम भी बढ़ सकता है।

ऐसे में टैक्सपेयर्स को सबसे पहले इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने ITR का स्टेटस चेक करना चाहिए। अनवेरिफाइड रिटर्न होने पर उसे डिस्कार्ड करके सही फॉर्म के साथ नया रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। वहीं, वेरिफाइड रिटर्न में गलती होने पर रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करना होगा।

अगर सही ITR फॉर्म को लेकर अभी भी असमंजस है, तो चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

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