August 21, 2026
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पटना जीपीओ में हुए 5.42 करोड़ रुपये से अधिक के बचत बैंक घोटाले की ईडी जांच में नया खुलासा हुआ है। आरोपित मुन्ना कुमार और उनके स्वजन के फ्रीज खातों को अनफ्रीज कर लाखों रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है। ईडी ने इसकी जानकारी डाक विभाग के बिहार सर्किल को पत्र के माध्यम से दी। इसके बाद सर्किल कार्यालय ने पटना जीपीओ को पत्र भेजा, जिसके आधार पर गुरुवार को एपीएम मनोज कुमार, जितेंद्र पासवान और राजीव कुमार को निलंबित कर दिया गया। फ्रीज खाते खुले तो उठे बड़े सवाल
पटना जीपीओ में वर्ष 2019 के घोटाले की जांच में पाया गया कि मुख्य आरोपित मुन्ना कुमार या उनके स्वजन के नाम के खातों को फ्रीज किया गया था।

अब सवाल उठ रहा है कि डिप्टी सीपीएम के निर्देश के बिना एसबीएचओ में कार्यरत कर्मचारियों ने फ्रीज खातों को अनफ्रीज कैसे किया।
इसी तरह सर्किल कार्यालय के आदेश के बिना जीपीओ प्रशासन ने अनफ्रीज करने का आदेश कैसे जारी कर दिया। 31 लाख के भुगतान पर भी ईडी की नजर
इसी घोटाले के मामले में एक कर्मचारी एमजीएस जगत प्रसाद को कोर्ट ने हाल ही में बरी कर दिया था।
कोर्ट ने जगत प्रसाद को लगभग 31 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश डिप्टी सीपीएम को दिया था।
इसका पत्र भी जारी कर दिया गया था, लेकिन ईडी के आदेश पर भुगतान की गई रकम वाले बैंक खाते को फ्रीज कराया गया है। 327 निष्क्रिय खातों से हुआ था गबन
सात वर्ष पुराने इस मामले में अब ईडी ने धन शोधन की जांच तेज कर दी है। एजेंसी ने सात लोगों को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया था।
इनमें डाक सहायक मुन्ना कुमार, सुजय तिवारी, राजेश शर्मा, सुनील कुमार, आदित्य कुमार, तत्कालीन सीपीएम एवं वर्तमान प्रभारी राजदेव प्रसाद तथा तत्कालीन डिप्टी सीपीएम अरुण कुमार झा सहित एसबीसीओ के दो कर्मचारी शामिल हैं। ईडी की टीम पटना जीपीओ पहुंचकर दस्तावेज भी खंगाल चुकी है।
50 लाख से शुरू हुई जांच, 5.42 करोड़ तक पहुंची रकम
यह घोटाला शुरू में 50 लाख रुपये का माना गया था, लेकिन विभागीय जांच में रकम बढ़कर 5.42 करोड़ रुपये हो गई।
गबन 327 निष्क्रिय बैंक खातों से किया गया था। फिक्स्ड डिपाजिट और मंथली इनकम स्कीम के उन खातों को निशाना बनाया गया, जिनमें वर्षों से कोई लेनदेन नहीं हुआ था। आरोप है कि निकासी ऑनलाइन माध्यम से की गई। खाते मैन्युअल बंद, ऑनलाइन अपडेट नहीं
खातों को मैन्युअल रूप से बंद कर दिया गया, लेकिन आनलाइन अपडेट नहीं किया गया। मुख्य आरोपित मुन्ना कुमार को पहले निलंबित किया जा चुका था।

उन्होंने 40 लाख और सुजय तिवारी ने 45 लाख रुपये विभागीय खाते में वापस जमा किए थे। आदित्य कुमार सिंह को सेवानिवृत्ति से पहले बर्खास्त कर दिया गया था
रेखा कुमारी की शिकायत से खुला था राज
घोटाले का खुलासा अशोक नगर निवासी रेखा कुमारी की शिकायत के बाद हुआ था। जुलाई 2019 में विभागीय जांच शुरू हुई और 8 अगस्त 2019 को तत्कालीन सीपीएम राजदेव प्रसाद ने सीबीआई को जांच के लिए पत्र लिखा।
11 अक्टूबर 2019 को सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज की। अब ईडी की जांच से धन शोधन और अवैध संपत्ति से जुड़े नए पहलू सामने आने की उम्मीद है।

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