टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि वैश्विक कारोबार इस समय भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और कमोडिटी से जुड़ी अनिश्चितताओं के एक साथ बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को बदलते वैश्विक हालात के बीच अपने कारोबार की मजबूती और आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा पर नए सिरे से ध्यान देने की जरूरत है।
13 अक्टूबर को आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में चंद्रशेखरन ने कहा कि पिछले पांच दशकों में कारोबार ने महामारी और दो विश्व युद्धों जैसी परिस्थितियों का सामना किया है, लेकिन मौजूदा समय में भू-राजनीतिक, तकनीकी और कमोडिटी संबंधी व्यवधान एक साथ सामने आ रहे हैं। यह स्थिति कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में तकनीक का दुरुपयोग और इसके कारण श्रम बाजार में होने वाले बदलाव भी प्रमुख चुनौतियों में शामिल होंगे। इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष और आपूर्ति शृंखला में रुकावटों से कारोबार पर असर पड़ रहा है।
चंद्रशेखरन ने टाटा समूह की कंपनी जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) पर हुए साइबर हमले का उदाहरण देते हुए बताया कि इस घटना से कंपनी का उत्पादन लगभग छह सप्ताह तक प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा अनिश्चितताओं के बीच कंपनियों को यह तय करना होगा कि उनके कारोबार के लिए वास्तविक मजबूती और संकट से उबरने की क्षमता का क्या अर्थ है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत के लिए बड़ा अवसर
चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर उद्योग को भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश के पास इस क्षेत्र में वैश्विक आपूर्ति शृंखला का अहम हिस्सा बनने की क्षमता है। भारत में कुशल प्रतिभाओं, बड़े घरेलू बाजार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की संभावनाओं के कारण इस उद्योग के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि टाटा समूह का प्रमुख उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में ऐसी क्षमताओं का विकास करना है, जिनसे देश की घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिले। हालांकि, इसके लिए वैश्विक कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी और भारत में एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना आवश्यक होगा।
निवेश से पहले मांग और व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन जरूरी
चंद्रशेखरन ने सेमीकंडक्टर निर्माण में अत्याधुनिक तकनीक अपनाने से पहले बाजार की मांग और निवेश की व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी महत्वाकांक्षा के आधार पर निवेश करना उचित नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बिना पर्याप्त मांग का आकलन किए दो नैनोमीटर चिप निर्माण संयंत्र लगाने का निर्णय लेना सही नहीं होगा। निवेश ऐसा होना चाहिए, जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो और लंबे समय तक रोजगार के अवसर पैदा कर सके।
गुजरात और असम में टाटा समूह की बड़ी परियोजनाएं
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन (पीएसएमसी) के साथv साझेदारी में लगभग 91,000 करोड़ रुपये की लागत से सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन संयंत्र स्थापित कर रही है। इसके अलावा, असम में लगभग 27,000 करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग सुविधा विकसित की जा रही है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश में सेमीकंडक्टर की बढ़ती मांग को पूरा करना, घरेलू आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नेटवर्क से जोड़ना है। चंद्रशेखरन के मुताबिक, सही तकनीकी साझेदारी, व्यावहारिक निवेश और दीर्घकालिक रणनीति के माध्यम से भारत इस उभरते उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
