April 3, 2026
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एक्सएलआरआरई की ओर से ‘विजन विकसित भारत एट 2047’ के राष्ट्रीय विकास जनादेश के साथ एक सशक्त तालमेल को लेकर दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का शीर्षक था, एक ‘अभिसरण: सांस्कृतिक रूपों व स्वरों के माध्यम से उद्यमशीलता की यात्रा पर चिंतन’. भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) व एफएसीईएस की ओर से एक्सएलआरआई के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम एक्सएलआरआई को शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए प्रदान किए गए एक प्रतिष्ठित आईसीएसएसआर अनुसंधान अनुदान का परिणाम था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य संस्कृति को एक नए दृष्टिकोण से देखना था—इसे केवल ऐतिहासिक संरक्षण के दायरे से बाहर निकालकर, आर्थिक मूल्य, पहचान निर्माण और सतत जमीनी स्तर की उद्यमशीलता के लिए एक गतिशील रूप में मान्यता देना।

इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 50 से अधिक सांस्कृतिक कलाकारों को एक मंच पर लाया गया, जो इस परियोजना का हिस्सा थे, इनमें कुछ कलाकार सांस्कृतिक क्षेत्र की अग्रणी हस्तियां थीं. ये कलाकार झारखंड, ओडि़शा और छत्तीसगढ़ राज्यों से आए थे. सेमिनार की शुरुआत शैक्षणिक और औद्योगिक जगत के दिग्गजों द्वारा विरासत और उद्यम के मिलन बिंदु पर किए गए गहन चिंतन के साथ हुई. एक्सएलआरआई के नए बने रूरल-बिजनेस इनक्यूबेटर एक्ससाइट के फैकल्टी इंचार्ज डा. सौरव स्नेहव्रत ने इनोवेशन और ग्रामीण बिजनेस इनक्यूबेशन के क्षेत्र में एक्सएलआरआई के बढ़ते प्रभाव को और मज़बूत किया. उन्होंने संस्थान की इस प्रतिबद्धता पर जोर दिया कि वह अपनी अकादमिक उत्कृष्टता को जमीनी स्तर पर ठोस और असरदार नतीजों में बदलेगा।

इस मौके पर मुख्य वक्ता कलामंदिर व बिपोनी के संस्थापक अमिताभ घोष ने जमीनी स्तर पर इनोवेशन की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे स्थानीय परिस्थितियों को गहराई से समझें व अपने सैद्धांतिक विचारों को समुदाय-आधारित, टिकाऊ पहलों में बदलें. पद्मश्री प्रो. अनिल गुप्ता (आईआईएम अहमदाबाद) ने अपने प्रेरणादायक भाषण में इस बात पर जोर दिया कि जमीनी हकीकतों को समझना और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने के साथ-साथ भविष्य के उद्यमों के लिए नई मूल्य श्रृंखलाए तैयार करने में इनोवेशन लाना कितना जरूरी है।

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