हालिया स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, महिलाओं में हृदय रोग के मामलों की पहचान अक्सर समय पर नहीं हो पाती है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। २८ मार्च २०२६ को चेन्नई में आयोजित एक चिकित्सा संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं में दिल के दौरे के लक्षण पुरुषों की तुलना में काफी अलग और सूक्ष्म हो सकते हैं। जहाँ पुरुषों में अक्सर सीने में तेज दर्द मुख्य लक्षण होता है, वहीं महिलाओं में अत्यधिक थकान, सांस फूलना, जबड़े या पीठ में दर्द और मतली जैसे लक्षण देखे जाते हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
कित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस चूक के पीछे ‘क्लिनिकल बायस’ और जागरूकता की कमी एक बड़ा कारण है। महिलाओं में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में गिरावट आने से हृदय रोगों का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियां महिलाओं के हृदय स्वास्थ्य को अधिक प्रभावित करती हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि ४० वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को नियमित रूप से अपने कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप की जांच करानी चाहिए। जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार और दैनिक व्यायाम के माध्यम से हृदय रोगों के जोखिम को ८०% तक कम किया जा सकता है।
