
मानदेय वृद्धि के लिए पीएमसीएच और एनएमसीएच के इंटर्न चिकित्सकों ने मंगलवार को तीन घंटे ओपीडी उप रखा। इससे मरीजों को काफी परेशानी हुई। पीएमसीएच में सुबह साढ़े नौ बजे तक सभी ओपीडी और रजिस्ट्रेशन काउंटर को इंटर्न चिकित्सकों ने बंद करा दिया था। ओपीडी के बाहर कुछ घंटे तक मरीजों ने इंतजार किया। इसके बाद वापस लौटने लगे। करीब 2000 से अधिक मरीज वापस लौट गये। इंटर्न का कहना था कि हर तीन साल पर मानदेय बढ़ता है। इस संबंध में मंत्री और अधिकारियों को सूचना दी गई थी बावजूद कार्रव नहीं होने से ओपीडी पकड़ा।
बाद में पीके किशोर और अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर ने जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन केनर तले पर गए इंटर्न से वार्ता की। प्राचार्य और अधीक्षक ने बताया कि विभाग ने मानदेय में वृद्धि की फाइल बढ़ा दी है। उधर, एनएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों ने
ओपीडी ठप कर दिया। छात्रों ने रजिस्ट्रेशन काउंटर बंद करा दिया। दूर दरानसे आए मरीजों को बिना इलाज
लौटना पड़ा। दोपहर करीब 12 बजे अधीक्षक के आश्वासन पर ओपीडी सेवा बहlल की गयी।
पीएमसीएच में दोपहर 12.30 बजे से ओपीडी सेवा बहाल वार्ता के बाद पीएमसीए के इंटर्न चिकित्सक ने अपने-अपने ओपीडी में चले गए। ओहिडी के लिए रजिस्ट्रेशन काउंटर 12.30 बजे फिर से शुरू किया गया। तब तक पीएमसीएच में मरीजों की संख्या काठी कम हो गई थी। ओपीडी 2 बजे तक चला। मरीजों का इलाज शुरू हुआ। इधर, पीएमसीएच के चिकित्सकों ने कहा कि हमारी लड़ाई सिर्फ पैसों के लिए नहीं बल्कि सम्मान और अस्तित्व के लिए है। सरकार से तत्काल वजीफे का पुनरीक्षण कर बिहार को अन्य राज्यों के समकक्ष लाने की अपील की। इंटर्न चिकित्सकों ने कहा कि मरीजों के हित में हड़ताल वापस ली है, लेकिन बुण्यार से वे कार्यस्थल पर आगे लेकिन काम नहीं (पैन डाउन स्ट्राइक करेंगे। वर्तमान में इंटर्न डॉक्टरी को मात्र 20,000 प्रतिमाह मानदेय मिलता है। उन्होंने 40,000 प्रतिमाह मानदेय की रखी है।