टाटा स्टील की ओर से गोपाल मैदान में आयोजित पांच दिवसीय ट्राइबल कॉन्क्लेव ‘संवाद’ में देशभर से आए जनजातीय समुदाय, ज्ञान-संरक्षक, युवा नेता व कलाकार एक साथ जुड़े, जिसका उद्देश्य पहचान, परंपरा व जनजातीय समुदायों के भविष्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद को और गहराई देना व अपनी पहचान, पारम्परिक व्यंजन, संस्कृति व ज्ञान संवाद का अनुभव कराना था। रविवार को दूसरे दिन सुबह में अलग-अलग विषयों पर केन्द्रित चिन्तनशील सत्रों के लिए समर्पित था जिसमें कला और हस्तशिल्प, जिसमें परंपराओं की जड़ों और कला रूपों की उत्पत्ति की खोज की गई. जनजातीय उपचार पद्धतियां, जहां भारत में पारंपरिक उपचार की यात्रा पर विचार किया गया. अखड़ा, जिसमें पारिस्थितिक बुद्धिमत्ता और प्रकृति से जनजातीय जुड़ाव की गहरी समझ को व्याख्यायित किया गया।
जनजातीय व्यंजन, जहां स्थानीय पारंपरिक पाक कला को बढ़ावा देने के महत्व पर चर्चा हुईङ समुदाय के साथ, जिसमें पहचान और अपनत्व की कहानियां और संवाद शामिल थे. खासकर वे महिलाएं जो अब कैमरे के पीछे काम कर रही हैं जिससे अपने विजन, अपनी पीड़ा व अपनी आकांक्षाओं को दुनिया के सामने रख सकें और संवाद फेलोशिप, जिसमें मूर्त व अमूर्त विरासत, कहानी कहने की कला और जनजातीय कथाओं के विकास पर विचार-विमर्श हुआ.संवाद में रविवार की शाम मंच पर ‘रिदम्स ऑफ द अर्थ’ लांच किया गया जो संवाद का भारत का पहला बहु-जनजातीय, संगीतकार-आधारित बैंड, जिसमें 70 प्रतिभाशाली कलाकार शामिल हैं. इस बैंड ने लद्दाख के उत्साही संगीत समूह दा शग्स के साथ मिलकर अपना दूसरा एल्बम रिलीज किया। यह एल्बम जल्द ही टाटा स्टील फाउंडेशन के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध होगा।
इस एलबम से झारखंड, ओडि़शा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, सिक्किम, केरल व असम के जनजातीय समुदाय के कलाकार जुड़ेे हैं. इस एलबम में 12 जनजातीय समुदाय के गाने हैं. प्रत्येक गाने करीब 5-5 मिनट का है. झारखंड से हो, संथाल व उरांव, ओडि़शा से भूमिज, असस से राभा, बोरो, कारबी, सिक्किम से लेक्चा, पश्चिम बंगाल से टोटो, केरल से माविलन, गुजरात से कुंबी जनजातीय भाषाओं में कलाकारों ने गाने गाय हैं. इस मौके पर टाटा स्टील फाउंडेशन के सीइओ सौरव रॉय ने कहा कि पिछले करीब आठ वर्षों में ‘रिदम्स ऑफ द अर्थ’ ने अलग-अलग जनजातियों के प्रतिभाशाली संगीतकारों को एक मंच पर लाकर उनकी पहचान, उनकी संवेदनाओं और उनके विचारों को संगीत के ज़रिए अभिव्यक्ति दी है. दूसरा एल्बम तैयार करना व उसका लांच इस बात का प्रतीक है कि ये समुदाय इस प्रक्रिया पर गहरा विश्वास रखते हैं और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की इस साझा यात्रा को आगे बढ़ाने के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
