January 7, 2026
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 एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) की दो दिवसीय नेशनल सेमिनार ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ रविवार को बेंगलुरु के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स में शुरू हुई। सेमिनार के उद्घाटन संबोधन में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एक बार फिर स्वदेशी हथियारों की समय पर आपूर्ति करने पर जोर दिया है। उन्होंने एडीए को लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस की उड़ान के 25 साल पूरे होने पर बधाई दी और आज के लगातार बदलते समय में वायु सेना को ऑपरेशनली तैयार रखने के लिए कहा।

इस मौके पर डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ. समीर वी कामत ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर जोर दिया, जिससे विकसित भारत @2047 का विजन पूरा हो सके। सेमिनार में आधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी के अलग-अलग पहलुओं का अन्वेषण करना है, जिसमें अगली पीढ़ी के एयरक्राफ्ट के लिए विनिर्माण और संयोजन, डिजिटल विनिर्माण, एरोडायनामिक्स, प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी, फ्लाइट टेस्टिंग टेक्नीक, डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी, सर्टिफिकेशन चैलेंज, फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और एवियोनिक्स, फाइटर एयरक्राफ्ट में मेंटेनेंस चैलेंज, एयरक्राफ्ट डिजाइन पर ध्यान केंद्रित किया जाना है।

सेमिनार में भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के भविष्य और एलसीए तेजस के स्केच से स्क्वाड्रन तक के सफर के बारे में बताया जाएगा। एडीए ने एलसीए तेजस को डिजाइन और विकसित किया है, जिसके 5,600 से ज्यादा सफल फ्लाइट परीक्षण हो चुके हैं। इससे सरकारी लैब, एकेडमिक इंस्टीट्यूट और इंडस्ट्री समेत 100 से ज्यादा डिजाइन वर्क सेंटर जुड़े थे। एलसीए को चौथी पीढ़ी का फाइटर बनाने के लिए कार्बन कंपोजिट, हल्के मटेरियल, फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल, डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम, ग्लास कॉकपिट वगैरह जैसी कई खास तकनीक विकसित की गईं।

सेमिनार के दौरान तेजस प्रोग्राम से जुड़े जाने-माने स्पीकर टेक्निकल बातचीत की एक सीरीज देंगे। एलसीए तेजस मार्क-1ए देश में डिजाइन और बनाए गए फाइटर एयरक्राफ्ट का उन्नत संस्करण है और यह वायु सेना की ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा करने के लिए पावरफुल प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा। एलसीए तेजस मार्क-2 नौसेना संस्करण होगा, जिसे अभी विकसित किया जा रहा है। इस सेमिनार के हिस्से के तौर पर बड़ी संख्या में पीएसयू, डीपीएसयू, इंडस्ट्रीज़, लघु उद्योग अपने-अपने उत्पाद दिखा रहे हैं, जो हवाई इस्तेमाल के लिए देश में ही डिजाइन और विकसित किए गए हैं।

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