टाटा स्टील का इंडस्ट्रियल बाय-प्रोडक्ट्स मैनेजमेंट डिवीजन (आईपीएमटी) कंपनी में सस्टेनेबिलिटी, सर्कुलर इकॉनमी और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। यह जानकारी IBMD के एग्जीक्यूटिव-इन-चार्ज दीपंकर दास गुप्ता ने गुरुवार को सीएफई ऑडिटोरियम में आयोजित जागरूकता सत्र के दौरान दी। मीडिया से बातचीत में दासगुप्ता ने बताया कि टाटा स्टील में सस्टेनेबिलिटी केवल एक नीति नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो तीन प्रमुख सिद्धांत—प्लैनेट, पीपल और प्रॉफिट—पर आधारित है। उन्होंने कहा कि कंपनी की सस्टेनेबिलिटी नीति चार स्तंभों—पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, समुदाय और गवर्नेंस—पर टिकी है, जो वैश्विक ESG मानकों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि जहां अधिकांश कंपनियां केवल ESG मानकों तक सीमित रहती हैं, वहीं टाटा स्टील ने दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए एक समन्वित सस्टेनेबिलिटी ढांचा विकसित किया है।
बाय-प्रोडक्ट्स से आय और पर्यावरण संरक्षण दोनों
दासगुप्ता ने बताया कि IBMD सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है। स्टील उत्पादन के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट्स को प्रोसेस कर दोबारा उपयोग में लाया जा रहा है, जिससे कचरे में कमी के साथ कंपनी को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त हो रहा है।वर्तमान में IBMD करीब 25 प्रकार के उत्पादों का प्रबंधन कर रहा है, जिनका उपयोग निर्माण, सड़क निर्माण और सीमेंट उद्योग में किया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 16 मिलियन टन बाय-प्रोडक्ट्स को प्रोसेस कर उपयोग में लाया गया।यह डिवीजन हर साल करीब 8,500 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न कर रहा है, जिसमें आंतरिक उपयोग का भी बड़ा योगदान है। इससे कच्चे माल की जरूरत कम होती है और उत्पादन लागत घटती है।
कार्बन उत्सर्जन कम करने पर जोर
दासगुप्ता ने कहा कि स्टील उद्योग में कार्बन उत्सर्जन कम करना बड़ी चुनौती है, लेकिन कंपनी लगातार इस दिशा में काम कर रही है। नई तकनीकों जैसे इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) के उपयोग से पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस की तुलना में कम उत्सर्जन हो रहा है। वर्तमान में कंपनी का कार्बन फुटप्रिंट लगभग 2.2 टन CO₂ प्रति टन स्टील है, जिसे और कम करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि 2045 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो भारत सरकार के 2070 के लक्ष्य के अनुरूप है।
निर्माण क्षेत्र में बढ़ रहा उपयोग
IBMD द्वारा तैयार उत्पादों, विशेषकर स्लैग आधारित मटेरियल, का उपयोग सड़क और कंक्रीट निर्माण में तेजी से बढ़ रहा है। इनसे बने कंक्रीट की मजबूती M50 से M60 ग्रेड तक पहुंचती है और लागत में 15 से 30 प्रतिशत तक कमी आती है।टाटा स्टील अब तक 150 किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण में इन मटेरियल्स का उपयोग कर चुकी है। साथ ही पुलों और एलिवेटेड कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भी इनकी आपूर्ति की जा रही है।
रोजगार और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
IBMD के माध्यम से 4,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिल रहा है। दासगुप्ता ने बताया कि सभी उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लैब में परीक्षण किया जाता है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें। कंपनी अपने उत्पाद सीधे सरकारी एजेंसियों और निर्माण कंपनियों को उपलब्ध कराती है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और सरकारी नीतियों के चलते सस्टेनेबल मटेरियल की मांग तेजी से बढ़ रही है। आने वाले समय में IBMD नवाचार, दक्षता और नए उत्पादों के विकास पर विशेष ध्यान देगा। इस प्रकार, टाटा स्टील का IBMD न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहा है, बल्कि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा
