आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा है कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) देनदारी पर उच्चतम न्यायालय का हालिया फैसला वोडाफोन आइडिया के लिए एक ‘निर्णायक मोड़’ साबित हुआ है। इस आदेश ने लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता को समाप्त कर दिया है, जिससे कंपनी अब केवल अस्तित्व बचाने के संघर्ष से बाहर निकलकर टिकाऊ विकास और भविष्य की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। बिड़ला के अनुसार, सरकार के निर्णायक हस्तक्षेप और न्यायालय के रुख ने दूरसंचार क्षेत्र के परिचालन वातावरण में सकारात्मक बदलाव लाया है।
शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार, सरकार ने कंपनी की एजीआर देनदारी को ८७,६९५ (सत्तासी हजार छह सौ पचानवे) करोड़ रुपये पर स्थिर कर दिया है, जिसकी भविष्य में पुनरसमीक्षा भी की जा सकती है। बिड़ला ने विश्वास जताया कि कठिन समय स्थायी नहीं होता और मजबूत कंपनियां अंततः टिकी रहती हैं। अब स्पष्टता आने के बाद, कंपनी अपनी सेवाओं में सुधार और बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेगी।
