कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिला कुष्ठ निवारण कार्यालय की ओर से एएनएम के दूसरे बैच को सबल सेंटर में प्रशिक्षण दिया गया. एक दिवसीय कुष्ठ प्रशिक्षण में प्रशिक्षक जिला कुष्ठ परामर्शी डा. राजीव लोचन महतो ने सभी प्रतिभागियों को एमडीटी के नया रिवाइज्ड ट्रीटमेंट रेजिमेंन के बारे में अवगत कराया. उन्होंने बताया की एक अप्रैल 2025 से पूरे भारतवर्ष में नयी उपचार पद्धति को लागू किया गया है. नई पद्धती के आने से अब सिर्फ दो तरह के एमडीटी दवा दी जाएगी।
पहले कुष्ठ रोग के ईलाज के लिए चार प्रकार के एमडीटी मरीजों को दी जाती थी. अभी सिर्फ दो तरह की एमडीटी दी जाएगी जैसे 14 वर्ष के ऊपर वाले मरीजों को एडल्ट एमडीटी जबकि इससे कम उम्र के मरीजों को चाईल्ड एमडीटी प्रदान जाएगी. उन्होंने सभी प्रतिभोगियों को पेशेंट कार्ड, ट्रीटमेंट कार्ड, सेंसरी टेस्टिंग, वीएमटी, डब्लूएचओ ग्रेडिंग डिसाबिलिटी, पीईपी- एस डीआर, सिंगल डोज रिफाम्पीसिन के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग की जल्द पहचान कर ईलाज कराने से दिव्यांगता से बचा जा सकता है।
कुष्ठ रोग की एमडीटी दवा सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों में नि:शुल्क उपलब्ध है. डेमियन फाउंडेशन के दुर्योधन बागती ने दिव्यांगता रोकथाम एवं चिकित्सीय पुनर्वास एवं रिकस्ट्रक्टिव सर्जरी के बारे में विस्तृत जानकारी दी. खगेन दास गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को कुष्ठ मरीजों को होने वाले रिएक्शन को कैसे मैनेजमेंट करने के साथ-साथ सेल्फ केयर व सेकेंडी लेवल रिफरल सेंटर के बारे में जानकारी दी।
