टाटा पावर व यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक ने एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस साझेदारी का उद्देश्य ग्रिड आधुनिकीकरण, फास्ट चार्जिंग, पावर स्टोरेज और औद्योगिक कार्बन-मुक्ति जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अत्याधुनिक रिसर्च और इनोवेशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। यह साझेदारी न केवल तकनीकी विकास, बल्कि उद्योगों की जरूरतों के अनुसार एग्जीक्यूटिव एजुकेशन और कौशल विकास कार्यक्रमों के नए द्वार खोलेगी. इसके माध्यम से दोनों संस्थान साझा कार्यशालाओं, केस स्टडी और एक्सचेंज कार्यक्रमों पर जोर देंगे, जो टाटा पावर की रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप वैश्विक शैक्षणिक जुड़ाव व लंबी अवधि की रिसर्च क्षमता को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह समझौता यूनिवर्सिटी के दो बड़े विभागों वारविक मैन्युफैक्चरिंग ग्ग्रुप व स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के दशकों पुराने अनुभव और महारत पर आधारित है। साथ ही, यूनिवर्सिटी ने ऊर्जा प्रणालियों पर नए सिरे से ध्यान केन्द्रित करने का भी एलान किया है, जो इस साझेदारी को और मजबूती देगा. टाटा पावर के सीईओ और एमडी तथा डब्ल्यूएमजी में मानद प्रोफेसर, डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा कि टाटा पावर भारत में बिजली बनाने और इस्तेमाल करने के तरीके को बदलने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
हमारा लक्ष्य 100 करोड़ लोगों के जीवन को सशक्त बनाना, उन तक ऐसी बिजली पहुंचाना है जो सस्ती हो, पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए और आधुनिक तकनीकों पर आधारित हो. उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा भविष्य बना रहे हैं जहां ग्राहकों को कार्बन से मुक्ति और स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली मिले. उन्होंने कहा कियूनिवर्सिटी ऑफ वारविक, जो इलेक्ट्रिक पावर और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में दुनिया भर में मशहूर है, उसके साथ यह समझौता हमारे इन बड़े सपनों को जल्द पूरा करने में मदद करेगा।
