असम के गुवाहाटी के रहने वाले १६ वर्षीय मयंक चक्रवर्ती ने शतरंज की दुनिया में इतिहास रच दिया है। वे पूर्वोत्तर भारत के पहले और भारत के ८६वें ग्रैंडमास्टर बन गए हैं। मयंक ने यह गौरवपूर्ण उपलब्धि बुडापेस्ट, हंगरी में आयोजित ‘वीकेंड ग्रैंडमास्टर’ टूर्नामेंट में अपनी तीसरी और अंतिम जीएम नॉर्म हासिल करके प्राप्त की। इस सफर में उनकी रेटिंग २५०० के स्तर को पार कर गई है। उनकी यह सफलता न केवल उनके कठिन परिश्रम का परिणाम है, बल्कि उनके परिवार के त्याग की भी कहानी है। मयंक की मां, मौसमी चक्रवर्ती ने अपने बेटे के शतरंज करियर को पूरा समय देने और उसे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में ले जाने के लिए अपनी अच्छी-खासी सरकारी नौकरी छोड़ दी थी।
मयंक की यह यात्रा २०१४ में शुरू हुई थी और पिछले १० वर्षों में उन्होंने कई बाधाओं को पार किया है। पूर्वोत्तर में उन्नत कोचिंग सुविधाओं और प्रायोजकों की कमी के बावजूद, मयंक ने अपनी प्रतिभा के दम पर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई। मयंक ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां के निरंतर समर्थन और अपने कोचों को दिया है। उनकी इस उपलब्धि पर असम के मुख्यमंत्री और खेल जगत की हस्तियों ने बधाई दी है। मयंक अब आगामी विश्व जूनियर चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे हैं और उनका लक्ष्य भविष्य में विश्व चैंपियन बनना है, जो पूर्वोत्तर के उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा साबित होगा।
